
रायपुर, 3 जनवरी।छत्तीसगढ़ राज्य अपनी समृद्ध और अद्भुत लोक कला एवं लोक नृत्य परंपराओं के लिए देश-विदेश में विशिष्ट पहचान रखता है। इन्हीं सांस्कृतिक धरोहरों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से क्लाउड द्वारा आयोजित फोटो प्रदर्शनी इन दिनों कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
प्रदर्शनी में भानुप्रतापपुर, बस्तर अंचल से आए छात्र-छात्राओं ने जब बस्तर की सुंदर लोक कला और सांस्कृतिक छवियों को देखा, तो वे भावनाओं से अभिभूत हो उठे और “आमचो बस्तर, सुघर बस्तर” कहते हुए अपनी खुशी जाहिर की। इस आयोजन में हर वर्ग और हर आयु के लोगों ने न केवल सहभागिता की, बल्कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित छायाचित्रों के साथ फोटो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को डिजिटल मंच पर भी प्रसारित किया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोक कला और लोक नृत्य से जोड़ना, उन्हें जीवित रखना और विश्व पटल पर पहचान दिलाना है। कार्यक्रम की परिकल्पना एवं आयोजन के पीछे दीपेंद्र दीवान की सोच रही है, जिनका कहना है कि राज्य की सुंदर और समृद्ध संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।
प्रदर्शनी के अवलोकन हेतु अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें रेलवे के वाणिज्यिक अधिकारी राकेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती सरिता दुबे,कुलदीप शुक्ला सहित नोकिया एवं टाटा कंसलटेंसी से आए कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) से आईं पूर्व रायपुर निवासी श्रीमती दीपिका मिश्रा ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन कर “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” कहते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि वे आज भी अपनी मिट्टी की खुशबू को बहुत याद करती हैं। वहीं धनलक्ष्मी मिश्रा कॉलेज की प्राध्यापिका ने इसे युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।
इस फोटो प्रदर्शनी में श्री दीपेंद्र दीवान, श्री अखिलेश भरोस, श्री धनेश्वर साहू, सुश्री हर्षा सिंदूर एवं शौर्य दीवान के छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। दीपेंद्र दीवान ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं की झलक मिलती रहे।
प्रदर्शनी न केवल दृश्य सौंदर्य प्रस्तुत करती है, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोक जीवन, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त संदेश देती है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना, लोक कलाकारों एवं शिल्पकारों के योगदान को रेखांकित करना तथा लोक कला के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम में अन्य राज्यों एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने भी प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की सराहना की। बिलासपुर से पीएचडी कर रहे छात्रों का समूह विशेष रूप से इस प्रदर्शनी को देखने पहुँचा। वहीं पर्यटन से जुड़े उद्यमियों ने भी इस आयोजन में रोजगार एवं संभावनाओं के अवसर तलाशे।
यह आयोजन कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, संस्कृति अध्येताओं और आम नागरिकों के लिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जानने, समझने और अनुभव करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो रहा है।
यह फोटो प्रदर्शनी कल 04 जनवरी तक कला वीथिका, महंत घासीदास परिसर, घड़ी चौक, रायपुर में आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है तथा यह प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक आमजन के लिए खुली रहेगी।
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