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संकेत साहित्य समिति की वर्ष 2026 की पहली काव्य-गोष्ठी संपन्न

रायपुर, 21 जनवरी।संकेत साहित्य समिति ने नववर्ष 2026 की शुरुआत साहित्यिक ऊर्जा से भरपूर काव्य-गोष्ठी के आयोजन के साथ की।

  राजधानी के वृंदावन सभागार में आयोजित इस गोष्ठी में वरिष्ठ और नवोदित कवियों ने नई चेतना और सृजनात्मक विचारों से श्रोताओं को सराबोर किया।सरस और साहित्यिक वातावरण में संपन्न इस काव्य-गोष्ठी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के प्रख्यात भाषा-विज्ञानी एवं साहित्यकार डॉ. चित्तरंजन कर ने की। कार्यक्रम में प्रदेश के सुप्रसिद्ध कवि गिरीश पंकज, मीर अली मीर एवं सुरेन्द्र रावल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

   माता सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संकेत साहित्य समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने स्वागत भाषण में समिति की सुदीर्घ साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी काव्य-गोष्ठियाँ कवियों के बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास की प्रभावी कार्यशाला होती हैं।

   अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. चित्तरंजन कर ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, जो सीखना बंद कर देता है वह स्वयं को अभिव्यक्त नहीं कर पाता। विशेष अतिथि गिरीश पंकज ने काव्य-गोष्ठियों को नए सृजन की प्रेरणा का स्रोत बताया, वहीं सुरेन्द्र रावल ने साहित्यिक आयोजनों के महत्व पर अपने विचार रखे।

  नववर्ष के उपलक्ष्य में नई चेतना और नवीन परिकल्पनाओं पर आधारित कविताओं का पाठ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय एवं आमंत्रित कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं, जिनमें डॉ. चित्तरंजन कर, गिरीश पंकज, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, डॉ. सुधीर शर्मा, मीर अली मीर, सुरेन्द्र रावल, विजय मिश्रा ‘अमित’, पल्लवी झा सहित अनेक कवि शामिल रहे।

  गोष्ठी के प्रारंभ में छबिलाल सोनी द्वारा मंचासीन अतिथियों के साथ वरिष्ठ रंगकर्मी विजय मिश्रा ‘अमित’ एवं वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण लाहोटी का अंगवस्त्र, मोतियों की माला एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन पल्लवी झा ने किया, जबकि अंत में डॉ. दीनदयाल साहू ने आभार प्रदर्शन किया।