ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ईरान का सम्मान करें, क्योंकि देश ताकत की भाषा को बर्दाश्त नहीं करेगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता का दूसरा चरण ओमान में अगले सप्ताह होने वाला है।
पेजेश्कियन ने जोर देकर कहा कि ईरान को नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (एनपीटी) के तहत यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का पूरा अधिकार है।
परमाणु मुद्दे पर ईरान ने क्या कहा?
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, ‘परमाणु मुद्दे पर हमारी सोच नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी में बताए गए अधिकारों पर आधारित है।
ईरानी राष्ट्रपति ने हमेशा सम्मान का जवाब सम्मान से दिया है, लेकिन वह ताकत की भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकता।’
उन्होंने ओमान में हुई वार्ता को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि उनका प्रशासन बातचीत के लिए तैयार है।
अमेरिकी क्यों तैनात कर रहा सेना?
यह बयान खाड़ी में अमेरिकी सैन्य तैनाती में तेजी के बीच आया है। डोनल्ड ट्रम्प प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जनवरी के विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई को लेकर दबाव बढ़ा रहा है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्वीकार किया कि अमेरिका क्षेत्र में अपना सैन्य बेड़ा मजबूत कर रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, ‘इस क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता।’ अमेरिका ने जनवरी के अंत में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब सागर में तैनात किया था।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट इमेज से पता चला कि दर्जनभर F-15 फाइटर जेट, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट II विमान जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर पहुंचे हैं।
इसके अलावा, USS डेल्बर्ट डी ब्लैक डिस्ट्रॉयर स्वेज नहर से लाल सागर की ओर बढ़ रहा है, जबकि MQ-4C ट्राइटन ड्रोन खाड़ी में निगरानी कर रहा है। पहले E-11A, P-8 पोसाइडन और E-3G सेंट्री विमानों की मौजूदगी भी रिपोर्ट की गई थी।
ईरान का कड़ा रुख
अमेरिकी सैन्य तैनाती के बावजूद, अराघची ने यूरेनियम संवर्धन छोड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध की धमकी से नहीं डरेगा।
उन्होंने तेहरान फोरम में कहा, ‘हम संवर्धन पर इतना जोर देते हैं और इसे छोड़ने से इनकार करते हैं, भले ही हम पर युद्ध थोप दिया जाए।’
इस सब के बीच अमेरिका ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की कार्रवाई की निंदा की। यहां तीन सुधारवादियों को गिरफ्तार किया गया और नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को सजा सुनाई गई।
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