
रायपुर, 19 फरवरी।छत्तीसगढ़ को देश की “ऊर्जा राजधानी” के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 32,100 मेगावाट क्षमता की नई विद्युत परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगा।
ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने नया रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रस्तावित परियोजनाओं में 12,100 मेगावाट ताप विद्युत, 4,200 मेगावाट न्यूक्लियर, 2,500 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर तथा 13,300 मेगावाट पंप स्टोरेज क्षमता शामिल है। डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा उत्पादन के संतुलित मिश्रण और आधुनिक तकनीकों के समावेश से छत्तीसगढ़ को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में ठोस कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने ताप विद्युत पर निर्भरता घटाकर कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित कर देश की 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में जल विद्युत और पंप स्टोरेज परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो ग्रिड संतुलन में सहायक होंगी।
राज्य शासन द्वारा पंप स्टोरेज आधारित जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 2023 में नीति लागू की गई है। इसके तहत राज्य उत्पादन कंपनी द्वारा 8,300 मेगावाट क्षमता के छह स्थलों का चिन्हांकन किया गया है। इनमें से पांच परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार हो चुकी है और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) निर्माणाधीन है। निजी क्षेत्र में भी लगभग 5,000 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के अंतर्गत एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और राज्य उत्पादन कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा लगभग 2,000 मेगावाट की परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें अटल बिहारी ताप विद्युत गृह के जलाशय में 6 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्लांट, कोरबा पूर्व के बंद राखड़ बांध पर 32 मेगावाट सौर संयंत्र तथा 500 मेगावाट-ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्थापना प्रस्तावित है।
उन्होने बताया कि राज्य उत्पादन कंपनी द्वारा कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों तथा मड़वा में 800 मेगावाट की इकाई स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है।
पारेषण क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच उपकेंद्रों की संख्या 132 से बढ़कर 137 हो गई है। ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता में वृद्धि की गई है तथा 132 केवी लाइनों में पुराने कंडक्टरों को उच्च क्षमता वाले एचटीएलएस कंडक्टर से बदला जा रहा है। साथ ही 5,200 किमी ऑप्टिकल फाइबर ग्राउंड वायर का इंस्टॉलेशन पूर्ण कर 131 उपकेंद्रों को डिजिटल संचार नेटवर्क से जोड़ा गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 26,794 सोलर सिंचाई पंप, 7,833 सोलर पेयजल पंप और 1,709 सोलर हाईमास्ट स्थापित किए गए हैं। आगामी वर्षों में ऑफ-ग्रिड सोलर प्लांट और रूफटॉप सौर संयंत्रों के विस्तार की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के एमडी भीम सिंह कंवर, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के एमडी एस.के. कटियार और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के एमडी राजेश कुमार शुक्ला सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. यादव ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलित ऊर्जा मिश्रण, तकनीकी आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर एवं अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों के सवालों के विस्तृत उत्तर भी दिए और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना साझा की।
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