छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मानचित्र पर एक नई पहचान बना रहा है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का दूसरा दिन बस्तर की अनूठी परंपराओं और आत्मीय आतिथ्य के नाम रहा। किर्सी ग्राम धुड़मारास की सुंदर वादियों में पहुंची, जहां धुरवा डेरा होमस्टे में उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था।
धुड़मारास की धरती पर कदम रखते ही किर्सी का अभिनंदन स्थानीय परंपरा के अनुसार सिहाड़ी और महुए की विशेष माला पहनाकर किया गया। इस दौरान बस्तर की लोक संस्कृति की जीवंत झलक तब देखने को मिली, जब स्थानीय ग्रामीणों ने धुरवा नृत्य की थाप और पारंपरिक स्वागत गीतों के साथ उनकी अगवानी की। आत्मीयता के साथ किए गए इस स्वागत से किर्सी अभिभूत नजर आईं और कहा कि उन्हें अपने जीवन में इस तरह की अनुभूति पहली बार हो रही है।
स्वागत के पश्चात किर्सी ने बस्तर के पारंपरिक खान-पान का लुत्फ उठाया, जहां दोपहर के भोजन में उन्हें पूरी तरह स्थानीय और जैविक व्यंजनों से सजी थाली परोसी गई। किर्सी का यह प्रवास मुख्य रूप से धुड़मारास और उसके आसपास के क्षेत्रों को विश्व स्तरीय पर्यटन मानकों के अनुरूप ढालने पर केंद्रित है। वे न केवल स्थानीय जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव ले रही हैं, बल्कि ग्रामीणों और हितधारकों के साथ सीधा संवाद कर पर्यटन के नए अवसरों की पहचान भी कर रही हैं।
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