लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज

नई दिल्ली, 11 मार्च।लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को सदन में चर्चा के बाद खारिज हो गया। प्रस्ताव पर हुई बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।
सदन में चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ करीब चार दशकों बाद इस तरह का प्रस्ताव लाया गया है, जो देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए खेदजनक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल उठाकर एक गलत परंपरा की शुरुआत की है, जो निंदनीय है।
शाह ने कहा कि अध्यक्ष के फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन उनका निर्णय अंतिम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के नियमों के विपरीत बोलने का अधिकार किसी को नहीं है। गृह मंत्री ने राहुल गांधी के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता।
अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा में भाग नहीं लेते और कई बार महत्वपूर्ण सत्रों के दौरान विदेश यात्रा पर रहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्ष शीतकालीन सत्र के दौरान राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब कोई सदस्य विदेश में होता है तो वह सदन में कैसे बोल सकता है, क्योंकि यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
गृह मंत्री ने कहा कि जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाए जाते हैं तो इससे विश्व स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख प्रभावित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट सत्र के पिछले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष के बाहर ऐसा माहौल बनाया गया जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई थी।
उन्होंने कहा कि 75 वर्षों से संसद के दोनों सदनों ने देश के लोकतंत्र की नींव को मजबूत किया है और सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए अध्यक्ष संरक्षक की भूमिका निभाते हैं और सदन को नियमों के अनुसार ही चलाना पड़ता है।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में आरोप लगाया कि उन्हें कई बार बोलने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब विपक्ष के नेता को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा।
राहुल गांधी ने कहा कि संसद देश की जनता की आवाज उठाने का मंच है और यह किसी एक दल की नहीं बल्कि पूरे देश की संस्था है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष अपनी बात रखने के लिए खड़ा होता है, उसे रोका जाता है।
उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने एक समझौता कर लिया है और यह बात सभी जानते हैं।




