बस्तर के समग्र विकास को गति देगा ‘रोडमैप 2.0’, साय ने मोदी के सामने रखा विजन

रायपुर/नई दिल्ली, 07 अप्रैल।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के समग्र, समावेशी और सतत विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।
श्री साय ने इस दौरान राज्य की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में 31 मार्च तक माओवाद के उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद अब सरकार का मुख्य फोकस तेजी से विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के तहत एग्रो और एग्रो-फॉरेस्ट सेक्टर को बढ़ावा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ की रणनीति पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। इस योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बढ़ी है और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा कराए गए थर्ड पार्टी मूल्यांकन के अनुसार 93% गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहां 97% बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश और पुस्तकें मिल रही हैं। 97% गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि 89% ग्रामीणों के पास आयुष्मान कार्ड हैं और अधिकांश गांव स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ चुके हैं। मार्च 2026 तक राशन और आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95% से अधिक हो चुका है।
‘नियद नेल्ला नार योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए अब इसे 10 जिलों तक विस्तारित किया जाएगा, जिसमें बस्तर के 7 जिलों के अलावा गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई शामिल होंगे।
दूरस्थ इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत बस्तर में 38 मार्गों पर बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं ‘बस्तर पंडुम’ और ‘बस्तर ओलंपिक’ जैसे आयोजनों ने क्षेत्र में आत्मगौरव और नई ऊर्जा का संचार किया है।
नक्सल मुक्त पंचायतों में ‘एल्वद योजना’ के तहत एक करोड़ रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है। दंतेवाड़ा एजुकेशन सिटी की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो चुका है और गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में बस्तर के 85% परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आजीविका क्लस्टर विकसित कर लोगों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ और वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही ‘बस्तर मुन्ने’ नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री मोदी को बस्तर आने का निमंत्रण भी दिया और रेल व सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से हुई यह मुलाकात बेहद सार्थक रही और उनके मार्गदर्शन में बस्तर अब विकास और संभावनाओं के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।




