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मतदाता सूची विवाद पर ममता बनर्जी का हमला,फिर कोर्ट जाने की चेतावनी

कोलकाता, 8 अप्रैल। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस फैसले के खिलाफ एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।

   दरअसल, राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने अपनी मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी को निशाने पर लिया और कहा कि मतदाताओं के नाम हटाकर उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रणनीति से तृणमूल कांग्रेस को हराया नहीं जा सकता।

   मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वह पहले भी फरवरी में उच्चतम न्यायालय का रुख कर चुकी हैं और अब फिर से कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और यदि लोगों को वोट देने से रोका जाता है, तो यह गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है।

    निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में राज्य में कुल 7.66 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से लगभग 90.83 लाख नाम सूची से हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 11.85 प्रतिशत है, जिस पर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति जताई है। बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

   हुगली जिले के आरामबाग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूचियों में हेरफेर करने की कोशिश कर रही है और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग लोगों को फोन कर डराने-धमकाने का काम कर रहा है।

  बाद में बालागढ़ में एक अन्य रैली में मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सांस्कृतिक और खानपान की आजादी पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा को वोट देने का मतलब राज्य की पहचान, खानपान और भाषा पर असर पड़ना हो सकता है।

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