(संतोष कुमार यादव)
पुलिस कार्रवाई, जेल और परीक्षा छूटने के बाद भी छात्र मुद्दों पर अड़ी रहीं बलिया की बेटी की कहानी अलहदा है। इलाहाबाद में पढ़ाई दौरान छात्र मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाकर सुर्खियों में आईं, जेल गईं, परीक्षा छूटी… लेकिन संघर्ष से पीछे नहीं हटीं। वह थी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा रमा यादव, जिसका सफर छात्र राजनीति की चर्चित दास्तान बन गया। रमा की कहानी क्यों अलग है? क्योंकि यह सिर्फ छात्र राजनीति की कहानी नहीं, बल्कि उस जिद की कहानी है जिसमें एक लड़की ने सत्ता के सामने सवाल पूछने की हिम्मत दिखाई।किताबें छिनीं, परीक्षा छूटी, जेल मिली… लेकिन आवाज नहीं रुकी।
समाजवादी विचारधारा वाले परिवार में जन्मी रमा की परवरिश बहस, विचार और सामाजिक चेतना के माहौल में हुई। उनका सफर केवल एक छात्रा का शैक्षणिक सफर नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और छात्र राजनीति में सक्रिय हस्तक्षेप की कहानी भी है। पांच भाइयों के बीच चौथे नंबर की संतान रमा ने पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक और छात्र सरोकारों को भी अपनी पहचान बनाया। रमा की प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक की पढ़ाई प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुई। इंटरमीडिएट के बाद वर्ष 2011 में उन्होंने सीएमपी डिग्री कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया। पारिवारिक पृष्ठभूमि समाजवादी विचारधारा होने का असर रमा की सोच और सक्रियता में भी दिखा। वर्ष 2013 में छात्रसंघ चुनावों के दौरान समाजवादी छात्र सभा पैनल ने उन्हें उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया। यहीं से रमा की छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका शुरू हुई। पढ़ाई के साथ आंदोलन और संगठनात्मक गतिविधियां भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं।
रमा के लिए राजनीति सिर्फ मंच और नारे नहीं थी। वह छात्राओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और विश्वविद्यालयी समस्याओं को लेकर खुलकर आवाज उठाने लगीं। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रमा ने वर्ष 2016 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से परास्नातक किया और फिर एलएलबी में दाखिला लिया। इसी दौरान जुलाई 2018 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह के प्रयागराज दौरे पर छात्र मुद्दों को लेकर ज्ञापन देने की कोशिश की। सुरक्षा कारणों से मुलाकात न हो पाने पर उन्होंने काला झंडा दिखाकर विरोध दर्ज कराया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। करीब 15 दिन बाद रिहा होने पर भी रमा का आंदोलनकारी तेवर कम नहीं हुआ।
संयोग से तीन माह बाद नवंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रयागराज दौरा हुआ। इस बार भी रमा ने छात्राओं की सुरक्षा और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर विरोध का प्रयास किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। पिटाई और गिरफ्तारी के बाद करीब 20 दिन जेल में रहना पड़ा। इस दौरान लगातार मांग के बावजूद उन्हें एलएलबी की परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया। लेकिन वह टूटी नहीं। जेल से बाहर आने के बाद रमा यादव की मुलाकात समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुई। अखिलेश ने उन्हें और उनके साथियों का उत्साहवर्धन करते हुए सकारात्मक सोच के साथ पढ़ाई और संघर्ष जारी रखने की सलाह दी। 2025 में रमा की जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ा। सपा छात्र सभा की राष्ट्रीय सचिव बनाई गई। आज वे छात्रों की मुखर आवाज हैं।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की फेफना विधानसभा क्षेत्र के अंजुरपुर मझरिया गांव निवासी रमा की मां प्रभावती गृहणी हैं, पिता दुलार प्रसाद यादव पुलिस विभाग में दरोगा हैं। उन्होंने सभी बच्चों को खुलकर पढ़ने और आगे बढ़ने की आजादी दी। यही वजह रही कि परिवार का हर सदस्य शिक्षा और प्रतिस्पर्धा में आगे निकला। और सभी भाई-बहनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में शिक्षा और करियर की मजबूत पहचान बनाई। रमा के बड़े भाई प्रभूनाथ ने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की, दूसरे भाई त्रिभुवन नाथ ने बीएड किया, जबकि तीसरे भाई चतुर्भुजी नाथ ने बीटेक के बाद सीजीएल परीक्षा में देशभर में 49वीं रैंक हासिल की। सबसे छोटे भाई विकास यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी कर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की और छात्र राजनीति में महामंत्री पद का चुनाव भी लड़ा। संघर्ष, शिक्षा और राजनीतिक सक्रियता के बीच रमा यादव की कहानी आज पूर्वांचल की छात्र राजनीति में एक अलग पहचान बनाकर उभर रही है।




