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संकेत साहित्य समिति द्वारा हुआ सरस काव्य -गोष्ठी का आयोजन

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रायपुर 26 मई।संकेत साहित्य समिति द्वारा राजधानी रायपुर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में चेतना के विस्तार के लिए सरस काव्य -गोष्ठी का आयोजन किया गया।सिविल लाइन स्थित वृन्दावन सभागार में सम्पन्न इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि राजधानी के वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज थे।

    गोष्ठी में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवियों और कवयित्रियों ने बिगड़ते पर्यावरण की वजह से हवा, पानी, नदियों, पहाड़ों, वनों और पशु -पक्षियों सहित मानव समाज के अस्तित्व पर मंडराते गंभीर संकट पर अपनी -अपनी रचनाओं के माध्यम से गहरी चिन्ता प्रकट की । सभी रचनाकारों ने धरती के पर्यावरण को बचाने के लिए सामाजिक भागीदारी पर बल दिया  ।

   काव्य -गोष्ठी की अध्यक्षता राजधानी के ही वरिष्ठ भाषा -विज्ञानी डॉ. चित्तरंजन कर ने की ।सुपरिचित साहित्यकार सुरेन्द्र रावल,डॉ. मृणालिका ओझा और बलदाऊराम साहू विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे । कार्यक्रम के आरंभ में माँ सरस्वती की पूजा अर्चना के बाद समिति द्वारा अतिथियों का अंगवस्त्र, मोतियों की माला एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।मुख्य अतिथि की आसंदी से गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए गिरीश पंकज ने कहा कि प्रकृति का मानव प्रवृत्ति से गहरा नाता होता है ।काव्य गोष्ठियों में शामिल होने से नये सृजन को बल मिलता है।

  संकेत साहित्य समिति के संस्थापक और प्रांतीय अध्यक्ष डॉ माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने स्वागत भाषण दिया । उन्होंने देश और दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण के कारणों को दर्शाते हुए जीवन में वनों के महत्व पर प्रकाश डाला।डॉ. चित्तरंजन कर ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण दरअसल मानव के मानसिक प्रदूषण की ही देन है।जिस दिन मानव सजग एवं सतर्क हो जाएगा, प्रदूषण की समस्या भी सुलझ जाएगी। काव्य -गोष्ठी का संचालन कवयित्री पल्लवी झा ने किया।जिन रचनाकारों ने गोष्ठी में काव्य पाठ किया उनमें डॉ.चित्तरंजन कर , गिरीश पंकज, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, बलदाऊ राम साहू , सुरेन्द्र रावल, डॉ. मृणालिका ओझा, रामेश्वर शर्मा, संजीव ठाकुर,शशि सुरेन्द्र दुबे,डॉ.रविन्द्र सरकार , बीबीपी मोदी ,पल्लवी झा, गणेशदत्त झा, पूर्वा श्रीवास्तव, सुषमा पटेल,हरीश कोटक. राजकुमार सोनी, छबिलाल सोनी, रूपाली चक्रवर्ती , यशवंत यदु, मन्नूलाल यदु, रविश गुप्ता , विवेक राहटगाँवकर, मुरलीधर गोंडाने, गोपाल सोलंकी ,अंबर शुक्ला,राजेन्द्र रायपुरी , प्रदीप कुमार मिश्रा, रामचंद्र श्रीवास्तव, एच.एल. चन्द्राकर , दिलीप वरवंडकर, सिद्धार्थ श्रीवास्तव , चेतन भारती , राजेन्द्र ओझा, नीलिमा मिश्रा, कुमार जगदलवी ,राजेश जैन ‘राही’, लतिका भावे, डॉ.सीमा निगम, नर्मदा प्रसाद विश्वकर्मा , डॉ. कमल साहू, डॉ.मंजूला साहू, दिलीप टिकरिहा , माधुरी कर एवं शशांक खरे आदि शामिल थे । पर्यावरण चेतना  पर केन्द्रित  पढ़ी गईं कुछ रचनाओं के प्रमुख अंश निम्नानुसार हैं-

● रूठे-रूठे क्यों हो मेघा,पूछे हैं डलियाँ।

आकर थोड़ी प्यास बुझाओ, मुरझाईं कलियाँ।

 तपे धरा भी बंजर होकर,रो-रोकर फटती। 

ताल-तलैय्या नदिया सूखे,सबसे वह कटती।

पनघट प्यासा उपवन छूटा,सूनी हैं गलियाँ।

पल्लवी झा (रूमा)

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● गौरैया दिखती नहीं, नयी सदी के गाँव,

सन्नाटा पसरा हुआ, पानी है ना छाँव।

राजेश जैन ‘राही’

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 ●  यह दुनिया बदरंग हो जाएगी

      अगर हम अब भी न जागेंगे

      चाँद भी सूरज बन जाएगा

      अगर हम मनमानी न छोड़ेंगे

विवेक कुमार रहाटगांवकर

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● अब नदिया दूध से नहीं

   दूध की पन्नियों से आच्छादित है

   सरिता का प्रदूषित जल

   पीने के लिए बाधित है।

-एच एल. चन्द्राकर

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● एक परिंदा उड़कर आया मेरी छत पर।

गीत मनोहर उसने गाया  मेरी छत  पर।

वन-उपवन को हमने काटा बर्बर होकर,

उसने अपना नीड़ बनाया मेरी छत  पर।

– बलदाऊ राम साहू

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● पेड़ों से जीवन है , तुम उसे न काटना ।

बाँट सको तो घर-घर हरियाली बाँटना।।

-डॉ.माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’

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● बौने पौधे सजा रहे हैं अपना आंगन ।

  मानो सिमट गया है आसमान जैसा मन ।।

-डॉ. चित्तरंजन कर

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● अगर पेड़ कट जाएंगे तो  क्या

     हम सब बच पाएंगे,

     विकास के नाम पर केवल,

     झुलस झुलस मर जाएंगे.

 -गिरीश पंकज

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   गोष्ठी के अंत में कार्यक्रम संयोजक गणेश दत्त झा ने आमंत्रित अतिथियों एवं रचनाकारों के प्रति संकेत साहित्य समिति की ओर से आभार व्यक्त किया।