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छत्तीसगढ़ के भालुकोना में निकेल-तांबा भंडार का बड़ा संकेत

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(प्रतीकात्मक फोटो)

रायपुर/बेंगलुरु, 1 जून। भारत की एकमात्र सूचीबद्ध स्वर्ण एवं क्रिटिकल मिनरल्स खनन कंपनी डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ स्थित अपने भालुकोना निकेल-कॉपर-पीजीई (प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स) परियोजना में अतिरिक्त ड्रिलिंग के उत्साहजनक परिणामों की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार नई ड्रिलिंग से खनिजयुक्त क्षेत्र का दायरा काफी बढ़ा है, जिससे यह परियोजना देश की महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल्स खोजों में शामिल हो सकती है।

          कंपनी ने बताया कि हालिया ड्रिलिंग परिणामों में निकेल, तांबा और पैलेडियम युक्त खनिजीकरण का एक विस्तृत कॉरिडोर सामने आया है, जिसमें कुछ स्थानों पर प्लैटिनम की भी मौजूदगी दर्ज की गई है। यह खनिजीकरण लगभग 430 मीटर की लंबाई तक फैला हुआ पाया गया है और अभी भी खुला है, जिससे इसके 1.3 किलोमीटर तक विस्तारित होने की संभावना जताई जा रही है।

        यह परिणाम 18 मई 2026 को घोषित उस खोज को और मजबूत करते हैं, जिसमें भालुकोना क्षेत्र में महत्वपूर्ण निकेल-कॉपर-पीजीई सल्फाइड खनिजीकरण की पुष्टि हुई थी। कंपनी का मानना है कि यह परियोजना भारत में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

ड्रिलिंग के प्रमुख परिणाम इस प्रकार हैं

  • बीजेडी-02 ड्रिल होल में 15 मीटर क्षेत्र में 0.31 प्रतिशत निकेल समतुल्य (NiEq) ग्रेड।
  • बीजेडी-03 ड्रिल होल में 36 मीटर क्षेत्र में 0.23 प्रतिशत निकेल समतुल्य (NiEq) ग्रेड।
  • बीजेडी-04 ड्रिल होल में 6 मीटर क्षेत्र में 0.39 प्रतिशत निकेल समतुल्य (NiEq) ग्रेड।
  • कुछ उच्च ग्रेड वाले क्षेत्रों में 1.29 प्रतिशत तक निकेल समतुल्य (NiEq) दर्ज किया गया।

          कंपनी अब तक नौ ड्रिल होलों के माध्यम से लगभग 1,200 मीटर कोर ड्रिलिंग पूरी कर चुकी है, जबकि अन्य ड्रिल होलों के परीक्षण परिणाम अभी प्राप्त होने बाकी हैं।

         ड्रिलिंग से निकेल, तांबा, पैलेडियम और प्लैटिनम युक्त सल्फाइड खनिजीकरण की व्यापक उपस्थिति की पुष्टि हुई है। इससे पहले किए गए सूक्ष्म अध्ययन में पेंटलैंडाइट, चाल्कोपाइराइट और पाइरोटाइट जैसे सल्फाइड खनिजों की भी पहचान की गई थी, जिन्हें निकेल-कॉपर सल्फाइड प्रणाली के महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

       भालुकोना-जामनीडीह कंपोजिट लाइसेंस भारत सरकार की उस रणनीति के तहत जारी किए गए है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण और राष्ट्रीय संसाधन सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिजों की घरेलू खोज और विकास को गति देना है।

      डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. हनुमा प्रसाद मोदाली ने कहा कि नवीनतम ड्रिलिंग परिणामों ने भालुकोना खनिज प्रणाली के आकार और निरंतरता को लेकर कंपनी का विश्वास और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और संसाधन सुरक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है तथा भारत इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

       उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन तथा समुदायों के सहयोग से कंपनी परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। प्राप्त परिणामों के आधार पर अब ड्रिलिंग कार्यों को और तेज किया जा रहा है ताकि खनन योग्य संसाधन का निर्धारण कर जल्द से जल्द माइनिंग लीज के लिए आवेदन किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी सकारात्मक परिणाम मिलने पर भालुकोना परियोजना भारत की पहली निकेल-कॉपर-पीजीई खदान के रूप में विकसित हो सकती है।

     कंपनी ने बताया कि मानसून के दौरान कम प्रभाव वाले अन्वेषण कार्य, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण, मिट्टी परीक्षण और नए लक्ष्यों की पहचान का कार्य जारी रहेगा, जबकि मानसून के बाद बड़े पैमाने पर ड्रिलिंग अभियान दोबारा शुरू किया जाएगा।