(सन्तोष यादव)
सुलतानपुर, 07 जून। सरकारी तंत्र को अक्सर नियम-कायदों और प्रशासनिक आदेशों तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसे फैसले भी सामने आते हैं जो प्रशासन का मानवीय और संवेदनशील चेहरा उजागर कर देते हैं। सुलतानपुर में एक महिला कांस्टेबल के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता की ऐसी ही मिसाल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।
बल्दीराय तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान महिला कांस्टेबल कल्पना चौरसिया अपने छोटे बच्चे के साथ ड्यूटी पर तैनात थीं। वर्दी की जिम्मेदारियों और मातृत्व की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की उनकी स्थिति पर जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की नजर पड़ी। महिला कांस्टेबल की परेशानी को समझते हुए डीएम ने तत्काल मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया और उन्हें बच्चे के साथ घर जाने की अनुमति प्रदान की।
डीएम की इस पहल की सराहना अभी हो ही रही थी कि अगले ही दिन पुलिस विभाग ने भी एक ऐसा निर्णय लिया जिसने इस कहानी को और अधिक भावनात्मक बना दिया। पुलिस अधीक्षक चारू निगम द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के तहत महिला कांस्टेबल कल्पना चौरसिया को जयसिंहपुर थाने में तैनात कर दिया गया, जहां उनके पति आरक्षी कृष्ण कुमार पहले से कार्यरत हैं।
अब तक ड्यूटी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत इस दंपति के लिए यह आदेश किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। एक ही थाने में तैनाती मिलने से न केवल दोनों को पारिवारिक जीवन में सहूलियत मिलेगी, बल्कि उनके छोटे बच्चे को भी माता-पिता दोनों का सान्निध्य अधिक समय तक मिल सकेगा।
महिला कांस्टेबल कल्पना चौरसिया और उनके पति कृष्ण कुमार ने जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह तथा पुलिस अधीक्षक चारू निगम के प्रति आभार व्यक्त किया है। वहीं आमजन और पुलिस विभाग के बीच इस फैसले को संवेदनशील प्रशासन, मानवीय पुलिसिंग और परिवार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।
यह घटना बताती है कि जब प्रशासनिक निर्णयों में मानवीय संवेदनाएं शामिल होती हैं, तो वे केवल आदेश नहीं रहते, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन जाते हैं।




