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INDIA गठबंधन की बैठक में CJI को पत्र भेजने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सहमति

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नई दिल्ली, 08 जून। विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की राजधानी दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, आर्थिक चुनौतियों और विपक्षी एकजुटता जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में शामिल 25 राजनीतिक दलों के नेताओं ने पांच प्रमुख मुद्दों पर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया और केंद्र सरकार को विभिन्न जनहित के विषयों पर घेरने की रूपरेखा तैयार की।

      दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि INDIA गठबंधन के सभी सहयोगी दल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), वोटर डेटा से जुड़े विवादों और चुनावों की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों को लेकर गठबंधन भारत के प्रधान न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र भेजेगा। इस पत्र में लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

       खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अत्यंत आवश्यक हैं तथा यदि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर लगातार सवाल उठते हैं तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है। इसी कारण विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायपालिका के समक्ष उठाने का निर्णय लिया है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

     बैठक में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। विपक्षी दलों ने नीट परीक्षा विवाद, पेपर लीक की घटनाओं तथा सीबीएसई से जुड़े विभिन्न मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्रालय के कार्यकाल में लाखों छात्रों और युवाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

     उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों का विश्वास कमजोर किया है। इसी को देखते हुए INDIA गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करने का निर्णय लिया है। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरा

        बैठक में देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गठबंधन नेताओं का मत था कि आम जनता महंगाई और रोजगार संकट से जूझ रही है, जबकि किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।

       खड़गे ने कहा कि इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा के लिए केंद्र सरकार को तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सभी राजनीतिक दलों को साथ बैठाकर समाधान खोजने की आवश्यकता है ताकि जनता की समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान हो सके।

हर दो महीने में होगी INDIA गठबंधन की बैठक

       बैठक में विपक्षी एकजुटता को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित संवाद और समन्वय पर भी जोर दिया गया। सभी सहयोगी दलों ने सहमति जताई कि INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं की बैठक हर दो महीने में आयोजित की जाएगी। इसके तहत अगली बैठक हैदराबाद में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

      गठबंधन नेताओं का मानना है कि लगातार संवाद और समन्वय से विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।

मानसून सत्र के लिए बनाई गई रणनीति

      बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने तय किया कि संसद के भीतर और बाहर जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। इसके लिए मानसून सत्र के दौरान प्रतिदिन सुबह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि विभिन्न दलों के बीच रणनीतिक तालमेल बना रहे।

भाजपा के खिलाफ संयुक्त संघर्ष पर जोर

        बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ राजनीतिक रणनीति और विपक्षी एकता को मजबूत करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श हुआ। अपने प्रारंभिक संबोधन में मल्लिकार्जुन खड़गे ने सहयोगी दलों से उस एकजुटता को और मजबूत करने का आह्वान किया, जो हाल के महीनों में विभिन्न संसदीय और राजनीतिक मुद्दों पर देखने को मिली थी।

       उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बना रही है। खड़गे ने कहा कि विपक्ष का दायित्व है कि वह संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करे।

कई प्रमुख नेता हुए शामिल

      बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले सहित 25 दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

     शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रतिनिधि, सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई महासचिव डी. राजा, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित कई अन्य दलों के नेताओं ने भी बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

      बैठक के निष्कर्षों से स्पष्ट संकेत मिला कि विपक्षी गठबंधन आने वाले महीनों में चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा, रोजगार, महंगाई और किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ेगा।