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छत्तीसगढ़ में एक जुलाई से महंगी होगी बिजली

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रायपुर, 15 जून। छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को 1 जुलाई 2026 से अधिक बिजली बिल चुकाना होगा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी देते हुए घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 30 से 50 पैसे तक तथा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की घोषणा की है। कृषि पंपों के लिए उपयोग होने वाली बिजली भी 40 पैसे प्रति यूनिट महंगी कर दी गई है।

      सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग के सदस्य विनोद गनोदवाले और अजय सिंह ने नई दरों की जानकारी दी। आयोग ने बताया कि नई दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।

      दरअसल, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने करीब 6,304 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। हालांकि आयोग ने विस्तृत परीक्षण के बाद कंपनी के दावे को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल 1,662 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे को मान्यता दी और औसतन 6.23 प्रतिशत टैरिफ वृद्धि को मंजूरी दी।

      आयोग के अनुसार, वितरण कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए 38,729 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और 32,520 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा था। जांच के बाद आयोग ने 39,760 मिलियन यूनिट बिजली बिक्री और 28,348 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता को स्वीकृत किया।

       वितरण कंपनी ने औसत विद्युत प्रदाय लागत 8.40 रुपये प्रति यूनिट प्रस्तावित की थी, जबकि आयोग ने इसे घटाकर 7.13 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया। वर्तमान टैरिफ के आधार पर औसत बिलिंग दर 6.71 रुपये प्रति यूनिट आंकी गई है, जो लागत दर से 42 पैसे कम है।

प्रमुख निर्णय

  • घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि।
  • गैर-घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी।
  • कृषि पंपों के लिए बिजली 40 पैसे प्रति यूनिट महंगी।
  • स्थानीय निकायों के कार्यालयों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया।
  • छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट एवं सार्वजनिक जल आपूर्ति को घरेलू श्रेणी का लाभ मिलेगा।
  • ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर, सरगुजा तथा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों के छात्रावासों को भी घरेलू श्रेणी में शामिल किया गया।
  • घरेलू उपयोग के अस्थायी कनेक्शनों पर दो वर्ष बाद सामान्य घरेलू टैरिफ लागू होगा।
  • बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास क्षेत्रों में स्थापित मोबाइल टावरों को ऊर्जा शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी गई है।

     नई दरों के लागू होने के बाद घरेलू, व्यावसायिक और कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, हालांकि आयोग ने वितरण कंपनी की मांग की तुलना में कम वृद्धि को मंजूरी दी है।