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छत्तीसगढ़ में बनेगा देश का पहला राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण सूचकांक, यूनिसेफ ने की पहल की सराहना

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रायपुर, 17 जून। छत्तीसगढ़ में बच्चों के समग्र विकास और कल्याण को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है।

     राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ इंडिया के बीच मंगलवार को नवा रायपुर स्थित नीति भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त और बस्तर अंजोर कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

     बैठक में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की अवधारणा में बच्चे केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और संरक्षण जैसी मूलभूत सुविधाएं हर बच्चे तक पहुंचाना राज्य की प्राथमिकता है।

      बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य नीति आयोग विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क के तहत 50 से अधिक विभागों के लिए प्रमुख प्रदर्शन संकेतक तैयार कर चुका है, जिसमें बाल कल्याण को एक स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल किया गया है।

देश में पहली बार बनेगा बाल कल्याण सूचकांक

     राज्य नीति आयोग ने राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण मापन प्रणाली और बाल वंचना सूचकांक विकसित करने की पहल की है। यह सूचकांक बच्चों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच और कमियों का आकलन करने में मदद करेगा। साथ ही बच्चों के लिए बजट विश्लेषण का एक मानक ढांचा भी तैयार किया जाएगा। यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय मॉडल बताया।

नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच सेतु बनेगी VC-SPS यूनिट

     राज्य नीति आयोग और यूनिसेफ के सहयोग से स्थापित ‘विकसित छत्तीसगढ़ सामाजिक नीति सहयोग इकाई (VC-SPS Unit)’ को साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। यह इकाई विभिन्न विभागों को तकनीकी सहयोग प्रदान कर बाल कल्याण, सामाजिक संरक्षण और बजट विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में सहायता कर रही है।

बस्तर अंजोर को मिला यूनिसेफ का समर्थन

      बैठक में बस्तर संभाग के सात जिलों में संचालित ‘बस्तर अंजोर’ कार्यक्रम को आदिवासी और बाल विकास के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया गया। 3+4 मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक संरक्षण पर केंद्रित है। यूनिसेफ ने इसे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई रोशनी बताया और इसके औपचारिक शुभारंभ में रणनीतिक भागीदार के रूप में शामिल होने की सहमति दी।

सामुदायिक जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन पर जोर

      बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि योजनाओं की सफलता केवल बजट और नीतियों से नहीं, बल्कि समुदाय के विश्वास और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन से भी तय होती है। यूनिसेफ की सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञता को बस्तर अंजोर और विकसित छत्तीसगढ़ के जमीनी क्रियान्वयन से जोड़ने पर सहमति बनी।

यूनिसेफ ने बढ़ाया सहयोग का भरोसा

       यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सोलेदाद हेरेरो ने कहा कि वर्ष 2019 से छत्तीसगढ़ सरकार और यूनिसेफ के बीच मजबूत साझेदारी रही है, जिसे आगे और विस्तारित किया जाएगा। उन्होंने बाल कल्याण, सार्वजनिक वित्त, सामुदायिक जागरूकता और बस्तर अंजोर जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

        बैठक के अंत में राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने यूनिसेफ टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह साझेदारी छत्तीसगढ़ के बच्चों के बेहतर भविष्य और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।