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वीबी-जी रामजी पर कांग्रेस का हमला: दीपक बैज बोले- 60:40 फंडिंग से बढ़ेगा राज्य पर बोझ

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रायपुर, 2 जुलाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से मांग की है कि मनरेगा के कार्य जुलाई माह से ही शुरू किए जाएं, ताकि बारिश के मौसम में भी ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा मनरेगा के नए स्वरूप “वीबी-जी रामजी” योजना में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के वित्तीय हिस्सेदारी के प्रस्ताव को मंजूरी देना राज्य के हितों के खिलाफ है।

    श्री बैज ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ सरकार को भी इस व्यवस्था पर केंद्र सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी किसानों के कार्यकाल के दौरान मनरेगा कार्य बंद करने सहित कई प्रावधानों पर अपनी असहमति जताई है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ऐसा करने का साहस नहीं दिखा सकी।

    उन्होंने कहा कि राज्य के वित्तीय संसाधन पहले से सीमित हैं। जीएसटी व्यवस्था के तहत अधिकांश कर संग्रह केंद्र सरकार के पास जाता है, ऐसे में मनरेगा की 40 प्रतिशत वित्तीय जिम्मेदारी राज्य पर डालने से अन्य विकास योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैज ने दावा किया कि भाजपा सरकार पिछले ढाई वर्षों से वित्तीय संकट का हवाला देकर नई योजनाएं शुरू नहीं कर पाई है और अब मनरेगा का अतिरिक्त बोझ विकास कार्यों को और प्रभावित करेगा।

     कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब तक मनरेगा पूरी तरह केंद्र प्रायोजित योजना थी, लेकिन नए प्रावधान के तहत राज्य को 40 प्रतिशत राशि वहन करनी होगी। उनके अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने केंद्र के इस निर्णय का विरोध करने के बजाय उसे मंजूरी देकर प्रदेश के हितों की अनदेखी की है।

     बैज ने यह भी कहा कि सरकार ने मनरेगा के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है, जबकि पहले इस योजना पर करीब 6,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे। ऐसे में सरकार द्वारा कार्य दिवस बढ़ाने के दावे पर भी सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि बजट कम होने की स्थिति में अधिक दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि मनरेगा के नए कानून को लागू हुए लगभग आठ महीने हो चुके हैं। सामान्यतः 15 जून के बाद मनरेगा के कार्य बंद हो जाते हैं, जबकि सरकार अब इस संबंध में निर्णय ले रही है। इससे मजदूरों को लगभग चार महीने तक रोजगार से वंचित रहना पड़ेगा और उसके बाद ही कार्य शुरू हो सकेंगे।