लखनऊ, 09 जुलाई। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने मंदिर परिसर में कार्यरत सभी कर्मचारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच कराने की मांग करते हुए दावा किया कि यदि ऐसा किया गया तो “99.9 प्रतिशत लोग भाजपा से जुड़े हुए मिलेंगे” और इससे कई बड़े खुलासे सामने आएंगे।
गुरुवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप था कि यदि मंदिर परिसर में कार्यरत सभी लोगों की सीडीआर की जांच कराई जाए तो भाजपा के अंदर ही हलचल मच जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा छोड़ने वालों का सिलसिला शुरू हो चुका है और कई लोग समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए अपने विचार बदलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के लिए धर्म से अधिक महत्व वोट और धन का है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में जिन लोगों ने जिम्मेदारियां तय की थीं, वे अब सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों से सवाल किए जा रहे हैं।
राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित विवाद पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह केवल अयोध्या का मामला नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था से जुड़ा विषय है। उनका आरोप था कि श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को अर्पित किए गए चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान को अर्पित धन या चढ़ावे की चोरी सबसे बड़ा पाप मानी जाती है और इस तरह के आरोपों से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
सपा प्रमुख ने राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एसआईटी का गठन केवल मामले की लीपापोती के लिए किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच दल के एक सदस्य पर पहले से धोखाधड़ी का मामला लंबित है, जिससे निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में मामले की गंभीर जांच चाहती है तो इसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्ष के नेताओं पर तत्काल मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं, जबकि सत्ता पक्ष के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता हमेशा स्थायी नहीं रहती।
इससे पहले अखिलेश यादव ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात भी की। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने प्रदेश में गौ-संरक्षण और निराश्रित गायों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस जांच दल में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को सदस्य बनाया गया है।




