नई दिल्ली, 15 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स और रेलवे क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 (National Investment Policy-2026) को मंजूरी दी, सेमीकंडक्टर उद्योग को गति देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के ‘सेमीकॉन 2.0’ कार्यक्रम को स्वीकृति दी और ओडिशा-झारखंड में 3,907 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई।
यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 के तहत देश में प्राकृतिक गैस आधारित 8 से 9 नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन संयंत्रों से करीब एक करोड़ टन अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी, जिससे भारत की आयात पर निर्भरता लगभग समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में भारत लगभग 3 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन करता है, जबकि वार्षिक मांग करीब 4 करोड़ टन है। इस कमी को पूरा करने के लिए हर वर्ष लगभग 1 करोड़ टन यूरिया का आयात करना पड़ता है। नई नीति लागू होने के बाद इस अंतर को घरेलू उत्पादन से भरने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।
नई निवेश नीति की प्रमुख विशेषताएं
राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से कई प्रावधान किए गए हैं। इनमें स्थिर एवं परिवर्तनीय लागत के आधार पर सब्सिडी की अलग-अलग गणना, यूरिया संयंत्र संचालित करने वाली कंपनियों को 12 से 16 प्रतिशत तक सुनिश्चित प्रतिफल (रिटर्न) तथा विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करने की व्यवस्था शामिल है।
सरकार के अनुसार यह नीति वर्ष 2012 की नई निवेश नीति (NIP-2012) का विस्तारित स्वरूप है, जिसका उद्देश्य उर्वरक क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, घरेलू उत्पादन क्षमता का विस्तार करना और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, आयात पर होने वाला खर्च घटेगा तथा उर्वरक उद्योग में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी, छह वर्षों में ₹1.27 लाख करोड़ का निवेश
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को नई गति देने के लिए ‘सेमीकॉन 2.0’ कार्यक्रम को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत अगले छह वर्षों में 1,27,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
श्री वैष्णव ने कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेमीकंडक्टर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिसाइल, ड्रोन, कंप्यूटर, कैमरा, चिकित्सा उपकरण और संचार प्रणाली जैसे लगभग सभी आधुनिक उपकरण चिप तकनीक पर आधारित हैं।
सरकार का अनुमान है कि सेमीकॉन 2.0 के तहत लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश आकर्षित होगा। इससे प्रतिवर्ष करीब 2 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और 1 लाख करोड़ रुपये तक का निर्यात संभव हो सकेगा।
अनुसंधान, डिजाइन और विनिर्माण पर विशेष जोर
नई योजना के अंतर्गत चिप डिजाइन, बौद्धिक संपदा (आईपी), अनुसंधान एवं विकास, सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, विशेष रसायनों और गैसों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। साथ ही सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब और अन्य अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार ने बताया कि देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब के 2028 तक उत्पादन शुरू करने की संभावना है। वर्तमान में 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा 315 विश्वविद्यालयों में अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अब तक लगभग 68 हजार छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
सरकार ने यह भी बताया कि सेमीकॉन 1.0 के अंतर्गत अब तक 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें से तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
ओडिशा और झारखंड में रेलवे की दो बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली रेलवे की दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है।
इन परियोजनाओं के तहत भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर अतिरिक्त लाइन जोड़ी जाएगी। सरकार का लक्ष्य इन्हें 2030-31 तक पूरा करना है।
सरकार के अनुसार अतिरिक्त रेल क्षमता विकसित होने से ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा, माल परिवहन तेज होगा और रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम होगी। प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई इन परियोजनाओं से ओडिशा और झारखंड के चार जिलों के लगभग 1,526 गांवों तथा करीब 14 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।
रेल मंत्रालय का अनुमान है कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद प्रतिवर्ष 4.4 करोड़ टन अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता विकसित होगी। साथ ही लगभग 6 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत और 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास, रोजगार और लॉजिस्टिक्स दक्षता को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।



