रायपुर, 16 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को अल्दा गांव की कथित फर्जी ग्रामसभा के आधार पर उद्योग स्थापना का मामला जोरदार ढंग से उठा।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक भूपेश बघेल ने सरकार पर मामले में सरपंच, पंचायत सचिव और लाभान्वित उद्योगों को बचाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार की ओर से वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ग्रामसभा का प्रस्ताव कथित तौर पर गलत तरीके से तैयार किया गया था। इसके बावजूद एफआईआर केवल अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि ग्रामसभा का पंजीयन रजिस्टर पंचायत सचिव के पास रहता है, ऐसे में सरपंच और सचिव के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित फर्जी ग्रामसभा से जिन उद्योगों को लाभ मिला, उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बघेल ने कहा कि घटना को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या संबंधित उद्योगों को आवंटित भूमि निरस्त कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि जांच के दौरान ग्रामसभा प्रस्ताव से संबंधित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है। इस आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जा रही है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित ग्राम पंचायत से जवाब प्राप्त होने तक किसी भी प्रकार का भूमि आवंटन नहीं किया जाएगा।
हालांकि सरकार के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारेबाजी करते हुए फर्जी ग्रामसभा प्रकरण में तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की तथा विरोधस्वरूप सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया।



