नई दिल्ली/रायपुर, 22 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए जमानत को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को अनावश्यक मानते हुए उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जमानत निरस्तीकरण से जुड़े कानूनी प्रश्न अभी भी खुले हैं और भविष्य में उपयुक्त मामलों में उन पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि क्या केवल इसलिए किसी आरोपी की जमानत रद्द की जा सकती है कि जमानत आदेश में विस्तृत कारण दर्ज नहीं किए गए हैं। अदालत ने जमानत आदेशों को बार-बार चुनौती दिए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को मुकदमों की समयबद्ध जांच और शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि जमानत आदेशों को लगातार चुनौती देने की प्रवृत्ति न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक दबाव डाल रही है। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने भी अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि यदि किसी जमानत आदेश में कानूनी त्रुटि हो, तो भी वह स्वतः जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनती।
सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ईडी और राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी। साथ ही, अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा ईओडब्ल्यू और एसीबी की जांच प्रक्रिया पर की गई टिप्पणियों को मामले के निस्तारण के लिए अनावश्यक बताते हुए उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया।



