राजनांदगांव, 25 जुलाई। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सुरगी स्थित साकेत साहित्य परिषद की ओर से मासिक साहित्यिक परिचर्चा एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम तीन सत्रों में संपन्न हुआ। पहले सत्र में पद्म विभूषण एवं सुप्रसिद्ध पंडवानी कलाकार स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई, प्रख्यात हास्य लोक कलाकार रामू यादव तथा वरिष्ठ शिक्षाविद एवं शिवनाथ साहित्यधारा (डोंगरगढ़) के संरक्षक स्वर्गीय राजेंद्र सिंह ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साहित्यकारों और कलाकारों ने तीनों विभूतियों के कला, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के राजनांदगांव जिला समन्वयक आत्माराम कोशा ‘अमात्य’ थे। प्रथम सत्र की अध्यक्षता परिषद अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ ने की, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता समरस साहित्य सृजन संस्थान छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ‘अकाट्य’ ने की। विशेष अतिथि के रूप में लखनलाल कलामे, गायत्री साहू ‘शिवांगी’, हर्षा देवांगन, डॉ. इकबाल खान ‘तन्हा’, प्रभात तिवारी तथा जितेंद्र पटेल ‘विद्रोही’ सहित अनेक साहित्यकार मौजूद रहे।
परिचर्चा के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी कला को विश्व मंच पर पहचान दिलाते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है तथा उनकी कला-साधना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
विशिष्ट वक्ता महेंद्र कुमार बघेल ‘मधु’ ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति शैली, ओजस्वी वाणी और सशक्त अभिनय के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा एवं लोकपरंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
मुख्य अतिथि आत्माराम कोशा ‘अमात्य’ ने कहा कि स्वर्गीय तीजन बाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकसांस्कृतिक चेतना की प्रतिनिधि थीं। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं होती, बल्कि पूरी मानवता की साझा सांस्कृतिक धरोहर है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’ ने नई पीढ़ी के कलाकारों से तीजन बाई के संघर्ष, कला-साधना और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। रोशनलाल साहू ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। मदन मंडावी ने उन्हें प्रदेश की सांस्कृतिक अस्मिता का सशक्त प्रतीक बताया, जबकि परिचर्चा का संचालन करते हुए लखनलाल साहू ‘लहर’ ने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।
वक्ताओं ने इस अवसर पर अंचल के प्रसिद्ध हास्य कलाकार रामू यादव तथा सेवानिवृत्त व्याख्याता एवं शिक्षाविद राजेंद्र सिंह ठाकुर के व्यक्तित्व एवं योगदान पर भी प्रकाश डाला।
दूसरे सत्र में साकेत साहित्य परिषद के 27वें वार्षिक सम्मान समारोह की रूपरेखा, आयोजन की तैयारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
समापन सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी का संयुक्त संचालन वीरेंद्र तिवारी ‘वीरू’ और पवन यादव ‘पहुना’ ने किया। गोष्ठी में प्यारेलाल देशमुख, दिलीप साहू ‘अमृत’, आनंद सार्वा, जसवंत मंडावी, कैलाश साहू ‘कुंवारा’, डोहरदास साहू, कुलेश्वरदास साहू, अमृत दास साहू, देवजोशी ‘गुलाब’, माला गौतम, पप्पू कलिहारी, चंचल साहू, आकाश साहू, राजेंद्र देवांगन सहित अनेक कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में कुलेश्वरदास साहू ने आभार प्रदर्शन किया।




