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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को विपक्ष ने बताया लोकतंत्र और युवाओं की जीत, जवाबदेही व शिक्षा सुधार की मांग दोहराई

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नई दिल्ली, 25 जुलाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इसे लोकतंत्र तथा छात्रों के आंदोलन की जीत बताया है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और छात्र आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह देशभर के युवाओं के संघर्ष का परिणाम है। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादतियों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग भी दोहराई।

      कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यह दिन देश के युवाओं और लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है। उनके अनुसार छात्रों ने शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी आवाज उठाई तथा कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने आंदोलन को जारी रखा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है और सरकारों को जनता की आवाज सुननी चाहिए।

       कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के करोड़ों युवाओं, विशेषकर “जेन-ज़ेड” (Gen Z), की जीत है। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर माफी मांगने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

        कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी इसे युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि विपक्ष शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता, छात्रों पर बढ़ते दबाव को कम करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की मांग को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।

        कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि छात्रों की आवाज आखिरकार सत्ता तक पहुंची है। उन्होंने इसे सत्य की जीत और युवाओं के संघर्ष की सफलता बताया तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आगे भी प्रयास जारी रखने की बात कही।

        छात्र आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र, शांति, धैर्य और जनभागीदारी की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अब ध्यान शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर केंद्रित होना चाहिए।

        जंतर-मंतर पर आयोजित सभा में छात्र संगठन सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि इस्तीफे के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने छात्रों की आत्महत्या के मामलों में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने तथा प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मुद्दा आधारित राजनीति पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा जैसे विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

        आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इसे देश के युवाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन अब रोजगार और जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों तक पहुंचेगा तथा सरकारों को अपनी गलतियों के लिए जिम्मेदारी तय करनी होगी।

        विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को वे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और नैतिक उपलब्धि मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।