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एमएमडीआर संशोधन पर महंत का हमला, बोले-खनिज राज्यों के अधिकारों पर हमला

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रायपुर, 16 अगस्त। छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने संसद में पारित एमएमडीआर संशोधन विधेयक को खनिज-समृद्ध राज्यों के संवैधानिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की प्राथमिकता राज्यों के हितों के बजाय बड़े कॉरपोरेट घराने हैं।

      डॉ. महंत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और कर्नाटक जैसे खनिज उत्पादक राज्यों के लिए वर्ष 2005 से लंबित खनिज राजस्व की वसूली का रास्ता खुला था। इन राज्यों की अर्थव्यवस्था और जनता के हितों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने संशोधन के जरिए इस फैसले की भावना को कमजोर करने का प्रयास किया है।

       उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से देश को अरबों-खरबों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन खनन प्रभावित राज्यों को विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में राज्यों को उनके वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना उचित नहीं है।

       डॉ. महंत ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्य को कितनी राशि मिलने की उम्मीद थी और एमएमडीआर संशोधन से संभावित रूप से कितना राजस्व प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसने संशोधन का केंद्र के समक्ष विरोध किया है और भाजपा के सांसदों ने छत्तीसगढ़ के हित में संसद में क्या रुख अपनाया।

      नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा केवल लौह अयस्क, कोयला और बॉक्साइट नहीं है, बल्कि यह राज्य के विकास और जनता के भविष्य से जुड़ी है। खनिज राजस्व से स्कूल, अस्पताल, सड़क, सिंचाई और रोजगार से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर, सरगुजा, कोरबा और रायगढ़ जैसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में इस राजस्व की महत्वपूर्ण भूमिका है।

      उन्होंने सवाल उठाया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्यों को उसका लाभ मिलने से पहले ही कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने केंद्र सरकार से संशोधन के पीछे की वजह और इससे लाभान्वित होने वाले पक्षों को स्पष्ट करने की मांग की।

       डॉ. महंत ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस पूरे मामले पर तत्काल श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व को यदि कोई नुकसान होता है तो सरकार को जनता के सामने उसका जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की खदानें किसी कॉरपोरेट के मुनाफे का साधन नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की साझा संपत्ति हैं और उनके लाभ में राज्य की जनता का पहला अधिकार होना चाहिए।