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देवदास बंजारे की पुण्य स्मृति में अगासदिया परिसर में सजा पंथी कला का मंच

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भिलाई नगर, 25 अगस्त। छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंथी नर्तक देवदास बंजारे की पुण्य स्मृति में सोमवार को भिलाई नगर के आमदी स्थित अगासदिया परिसर में स्मृति समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों, लोक कलाकारों और प्रबुद्धजनों ने देवदास बंजारे के व्यक्तित्व, उनकी कला यात्रा और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने में उनके योगदान को याद किया।

     देवदास बंजारे का 26 अगस्त 2005 को दुर्ग से रायपुर जाते समय सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। उनकी पुण्य स्मृति में आयोजित समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा सहित अनेक साहित्यकारों और कलाकारों ने उनसे जुड़ी स्मृतियां साझा कीं।

       समारोह में प्राचीन और दुर्लभ वाद्य यंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रिय ने मांदर वादन की प्रस्तुति दी, जबकि महंत अंतराम ने पंथी गीत प्रस्तुत किया। रिखी क्षत्रिय ने मांदर पर सात अलग-अलग विधाओं की धुनें प्रस्तुत कर समारोह में लोक संगीत की विशिष्ट छटा बिखेरी।

       वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने देवदास बंजारे के व्यक्तित्व और उनकी पंथी नृत्य साधना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवदास बंजारे ने पंथी नृत्य को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा रचित देवदास बंजारे की जीवनी आरूग फूल को वर्ष 1999 में मध्यप्रदेश शासन का सप्रे सम्मान प्राप्त हुआ था। देवदास बंजारे ने 64 विदेशी मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की पहचान विश्व स्तर पर स्थापित की। उन्होंने गुरु बाबा घासीदास के अमर संदेश को पंथी नृत्य के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया।

       घनश्याम देवांगन ने देवदास बंजारे को महान कलाकार बताते हुए उनके सम्मान से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि लिमतरा में उनके 50वें वर्ष में उन्हें सम्मानित किया गया था।

       राकेश गुप्ता रूसिया ने कहा कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में देवदास बंजारे का अद्भुत पंथी नृत्य देखा था। उन्होंने देवदास बंजारे को असाधारण प्रतिभा का कलाकार बताया।

        विनायक अग्रवाल ने कहा कि देवदास बंजारे केवल पंथी नर्तक ही नहीं, बल्कि कबड्डी के भी प्रसिद्ध खिलाड़ी थे। बाद में पंथी नृत्य के प्रति उनकी साधना और समर्पण ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध कलाकार बना दिया।

        शरद कोकास ने बताया कि देवदास बंजारे ने साक्षरता अभियान में भी सक्रिय सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि वे छत्तीसगढ़ के सच्चे सपूत थे और उन्होंने अपनी कला के माध्यम से प्रदेश की पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाया।

        रिखी क्षत्रिय ने देवदास बंजारे की विनम्रता और सहज व्यक्तित्व को याद किया। साहित्यकार बद्रीप्रसाद पारकर ने कहा कि देवदास बंजारे जैसा पंथी नर्तक दूसरा नहीं हुआ। अरुण अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने पंथी नृत्य के जरिए छत्तीसगढ़ का गौरव देश और विदेश में बढ़ाया।

         कवि अब्दुल कलाम ने समारोह के अंत में आभार व्यक्त करते हुए देवदास बंजारे के सरल, सहज और मिलनसार व्यक्तित्व की विशेषताओं को याद किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि देवदास बंजारे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला, साधना और पंथी नृत्य के माध्यम से बाबा घासीदास के संदेश को विश्व मंच तक पहुंचाने का उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।