पटना, 1 सितम्बर। बिहार में आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक जीतन राम मांझी पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने दोनों नेताओं को चुनौती दी कि यदि उन्हें आरक्षण व्यवस्था पर इतना भरोसा है तो वे अपनी सुरक्षित सीट छोड़कर सामान्य श्रेणी की सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।
श्री यादव ने आरोप लगाया कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी केंद्र की एनडीए सरकार में शामिल होने के बावजूद वंचित वर्गों के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दबाव में आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं।
आरजेडी नेता ने कहा कि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में उन्हें वंचित और पिछड़े वर्गों के हित में आरक्षण को मजबूत करने की पहल करनी चाहिए। तेजस्वी ने दोनों नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि वे वास्तव में आरक्षण के पक्षधर हैं तो उन्हें सामान्य श्रेणी की सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता साबित करनी चाहिए।
दरअसल, दलित समुदाय के सबसे वंचित वर्गों के लिए आरक्षण में उप-कोटा लागू करने के मुद्दे पर जीतन राम मांझी और चिराग पासवान के बीच मतभेद सामने आए हैं। मांझी जहां दलितों के वंचित वर्गों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए उप-कोटा की वकालत कर रहे हैं, वहीं चिराग पासवान इस विचार का विरोध कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है।
तेजस्वी ने इसी विवाद को आधार बनाकर एनडीए पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस आरक्षण व्यवस्था को कमजोर या समाप्त करना चाहते हैं और एनडीए में शामिल कई दलित एवं पिछड़े वर्गों के नेता इस मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि आरजेडी आरक्षण को खत्म करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा।
65 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा फिर उठाया
तेजस्वी यादव ने बिहार में आरक्षण की सीमा बढ़ाने के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब आरजेडी बिहार सरकार में शामिल था, तब पार्टी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव बनाकर वंचित जातियों के लिए आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की पहल कराई थी।
उन्होंने कहा कि आरजेडी ने इस कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग भी की थी। तेजस्वी के मुताबिक, इसके पीछे उनकी आशंका थी कि केंद्र में भाजपा की सरकार होने के कारण इस कानून को अदालत में चुनौती देकर रद्द कराने का प्रयास किया जा सकता है।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि उनकी आशंका सही साबित हुई और 65 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े कानून को नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और एनडीए के सहयोगी दलों ने अपेक्षित दबाव नहीं बनाया।
उन्होंने बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ-साथ एनडीए में शामिल दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं पर भी निशाना साधा। तेजस्वी ने कहा कि चिराग पासवान, जीतन राम मांझी के अलावा अन्य राज्यों के कुछ प्रमुख ओबीसी और दलित नेता भी आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रहे हैं।
पुलिस व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने या अपनी बात रखने वाले लोगों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में सरकार एक ऐसे ‘पुलिस राज्य’ की दिशा में बढ़ रही है, जहां सच बोलने पर लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है। उन्होंने हाल के दिनों में कथित फर्जी मुठभेड़ों और पुलिस हिरासत में मौत के मामलों का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसी घटनाओं से पुलिस और प्रशासन के प्रति आम लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव वैशाली जिले के ‘कुंदन’ नामक एक यूट्यूबर को भी अपने साथ लेकर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुंदन को हाल ही में वैशाली के एक मंत्री के इशारे पर गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया। आरजेडी नेता ने चेतावनी दी कि पार्टी ऐसे मामलों को लेकर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार को ‘नींद से जगाने’ के लिए आरजेडी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
तेजस्वी यादव ने एनडीए के सहयोगी दलों पर परिवारवाद को लेकर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाले एनडीए नेताओं को पहले अपने गठबंधन के भीतर झांकना चाहिए।
उन्होंने चिराग पासवान का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन राज्य सरकार में मंत्री हैं।तेजस्वी ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का भी जिक्र करते हुए एनडीए पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए में भी राजनीतिक परिवारों के लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल रही हैं।




