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NEET-UG प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज FIR होंगी रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई नई FIR पर रोक

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नई दिल्ली, 01 सितम्बर। NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज कई FIR रद्द करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि NEET-UG पेपर लीक और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

     सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद दिल्ली के अलावा असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में प्रदर्शन से संबंधित छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल 2,873 लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR जारी रहेंगी।

      मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश सौरव दास ने 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा कायम रखें तो सभी मुद्दों का धीरे-धीरे समाधान निकाला जा सकता है।

      मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जिसका खुले मन से बातचीत के जरिए समाधान न निकाला जा सके। अदालत की यह टिप्पणी केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के बाद बनी सहमति के संदर्भ में सामने आई।

      सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। बातचीत में तीन प्रमुख बिंदुओं पर आश्वासन दिया गया। इनमें प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना, भविष्य में ऐसी नई FIR दर्ज नहीं करना और प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों में मुआवजा दिए जाने का आश्वासन शामिल है।

     प्रदर्शनकारियों की ओर से सौरव दास ने अदालत में मुख्य न्यायाधीश के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासन, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने अदालत के आदेश के पालन की उम्मीद जताते हुए न्यायपालिका, दोनों पक्षों के वकीलों और सॉलिसिटर जनरल के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।

      सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी प्रदर्शनकारियों के रुख को रचनात्मक और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भी बातचीत के दौरान पूरी तरह सकारात्मक रवैया अपनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं और बातचीत के जरिए समाधान तलाशना ही बेहतर रास्ता है।

       दरअसल, 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के बाद तक स्थगित किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी के वकील डॉ. रिजवान ने अदालत में कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी भी मार्च या प्रदर्शन के आयोजन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।

       सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह नजर नहीं आती, जिसके आधार पर यह माना जाए कि प्रस्तावित मार्च से कोई अप्रिय घटना होने की आशंका है। इसके बाद केंद्र और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला।

      अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश और प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रस्तावित मार्च वापस लिए जाने के बाद NEET-UG विवाद को लेकर टकराव कम होने के संकेत मिले हैं। अदालत ने जहां छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में राहत दी है, वहीं हिंसा और तोड़फोड़ जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों को इससे अलग रखा है। इससे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन कायम करने की अदालत की कोशिश भी सामने आती है।