होम बाजार सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट के बाद सुधार, फिर भी लाल निशान में...

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट के बाद सुधार, फिर भी लाल निशान में बंद हुआ बाजार

0

मुंबई/नई दिल्ली, 11 सितम्बर। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 708 अंक और निफ्टी 234 अंक तक टूट गया। हालांकि, दिन के कारोबार के दौरान बाजार ने शुरुआती नुकसान का एक बड़ा हिस्सा संभाल लिया, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

       शुक्रवार को सुबह 9:14 बजे सेंसेक्स 708.56 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 74,194.03 पर आ गया था, जबकि निफ्टी 50 में 234.10 अंक यानी करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,243.70 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 74,160 और निफ्टी करीब 23,231 के निचले स्तर तक भी गया।

      हालांकि, बाद में बाजार में कुछ सुधार आया। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,781.76 पर और निफ्टी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत टूटकर 23,398.10 पर बंद हुआ। इस तरह शुरुआती भारी गिरावट के मुकाबले बाजार ने काफी नुकसान की भरपाई की, लेकिन लगातार वैश्विक दबाव के कारण निवेशकों का भरोसा पूरी तरह नहीं लौट सका।

मेटल और रियल्टी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

      शुरुआती कारोबार में मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मेटल में करीब 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि रियल्टी समेत कई अन्य प्रमुख सेक्टर भी लाल निशान में रहे। वित्तीय, ऑटो और कमोडिटी शेयरों पर भी दबाव बना रहा।

      लार्जकैप शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में शुरुआती कारोबार के दौरान क्रमशः करीब 1.4 प्रतिशत और 1.2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इससे साफ है कि बाजार में दबाव केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक स्तर पर बिकवाली का असर दिखाई दिया।

      सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एनटीपीसी दबाव में रहे। वहीं एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और कुछ अन्य शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की।

पांच लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बाजार पूंजीकरण घटा

     शुक्रवार की तेज गिरावट के दौरान निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी आई। शुरुआती कारोबार में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब पांच लाख करोड़ रुपये घट गया। बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच बड़ी संख्या में शेयर लोअर सर्किट तक पहुंच गए।

     बाजार में जारी कमजोरी का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही तीन महीने के निचले स्तरों के आसपास पहुंच गए। सप्ताह के आधार पर भी बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट की ओर बढ़े।

कच्चे तेल की कीमत बनी सबसे बड़ी चिंता

       बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। कच्चे तेल में इतनी तेज वृद्धि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।

      विश्लेषकों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और कंपनियों की कमाई पर भी पड़ सकता है। महंगे तेल से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बढ़ाई चिंता

      निवेशकों की चिंता केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड करीब 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई है। गुरुवार को यह 4.95 प्रतिशत के आसपास थी। बढ़ती बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है।

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर शेयर बाजारों पर इसलिए भी पड़ता है क्योंकि ऊंची यील्ड के दौर में निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित बॉन्ड अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे जोखिम वाले इक्विटी बाजारों से पूंजी बाहर निकलने का दबाव बढ़ सकता है।

एशियाई बाजार भी दबाव में

      भारतीय बाजार की कमजोरी का असर व्यापक वैश्विक बाजारों में भी दिखाई दिया। शुक्रवार को एशिया के कई प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी दबाव में रहे। वैश्विक निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण पश्चिम एशिया का तनाव, तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई के फिर बढ़ने की आशंका है।

      अमेरिकी बाजार भी गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डॉव जोन्स में 0.6 प्रतिशत और नैस्डैक में करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एसएंडपी 500 भी 0.6 प्रतिशत कमजोर रहा।

बाजार के लिए आगे भी चुनौतीपूर्ण दौर

        बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों की दिशा बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी रही तो महंगाई और ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से चिंता पैदा हो सकती है।

       शुक्रवार की गिरावट के बावजूद बाजार ने दिन के निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी भी सामने आई। हालांकि, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों के लिए अस्थिरता का दौर अभी समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है। विशेषज्ञों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।