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योगी का दावा: ‘लाभार्थी की कोई जाति नहीं’, विकास और अवसर ही सरकार का फोकस

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(फाइल फोटो)

लखनऊ, 20 सितम्बर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बड़े चुनावों के नतीजे किसी एक राजनीतिक समीकरण या मुद्दे से तय नहीं होते। प्रतिनिधित्व, जनता की उम्मीदें, स्थानीय मुद्दे, सरकार का कामकाज, उम्मीदवार और रोजमर्रा की जिंदगी में शासन का अनुभव जैसे कई कारक चुनावी परिणाम को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता चुनावी समीकरण साधने के बजाय प्रदेश के हर वर्ग को विकास की प्रक्रिया से जोड़ना रही है।

      श्री योगी ने एक साक्षात्कार में विपक्ष की पीडीए रणनीति और सामाजिक समीकरणों से जुड़े सवाल पर कहा कि उनकी सरकार का दृष्टिकोण योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव पहुंचाने का रहा है। उन्होंने कहा, “लाभार्थी की कोई जाति नहीं होती। लाभार्थी एक ऐसी श्रेणी है जो जाति से ऊपर है और यही हमारा गणित और हमारा राजनीतिक फार्मूला है।”

      योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में ओबीसी और दलित समुदायों के बड़े हिस्से ने सरकार का समर्थन किया, क्योंकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव पहुंचाया गया। उन्होंने गरीब परिवारों को राशन, पक्का मकान, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है। नौकरी, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और अवसरों तक समान पहुंच भी सामाजिक न्याय का हिस्सा है।

      गठबंधन और सीटों के बंटवारे से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ये संगठन और राजनीतिक दलों के स्तर पर बातचीत के विषय हैं। उनकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के रूप में यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं और सुविधाएं हर समुदाय, हर जिले और हर घर तक पहुंचें।

निवेश को रोजगार में बदलने पर जोर

     रोजगार और निवेश के सवाल पर योगी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य निवेश प्रस्तावों को वास्तविक आर्थिक गतिविधियों, उद्यम और रोजगार में बदलना है। उन्होंने 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को करीब 33.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। इनसे 93 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई थी।

      मुख्यमंत्री के अनुसार, इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा एमओयू स्तर से आगे बढ़ चुका है और करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए ग्राउंड-ब्रेकिंग की तैयारी है। उन्होंने कहा कि सरकार मानव संसाधन को मानव पूंजी में बदलने पर विशेष जोर दे रही है। इसके लिए उद्योग आधारित कौशल विकास, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

     योगी ने कहा कि प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई, 24 हजार से ज्यादा स्टार्टअप और 35 हजार से अधिक फैक्ट्रियां हैं। औद्योगिक गलियारों के आसपास 27 समन्वित विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स संकुल विकसित किए जा रहे हैं।

युवा सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहता

      मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा अब केवल सरकारी नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं है। वह प्रदेश में पढ़ाई, रोजगार, कारोबार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के अवसर चाहता है। सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं का पलायन रोकना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में ही उन्हें बेहतर भविष्य बनाने का विकल्प उपलब्ध कराना है।

      उन्होंने कहा कि प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में उत्तर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य का जीएसडीपी 2016-17 में करीब 13.30 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 36 लाख करोड़ रुपये हो गया है। चालू वित्त वर्ष में इसके करीब 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

     उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के अगले चरण में औद्योगिकीकरण, निर्यात, एमएसएमई और बेहतर वैल्यू वाली नौकरियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विकास का लाभ केवल नोएडा और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। पूर्वांचल और बुंदेलखंड को विकास के अगले चरण का महत्वपूर्ण इंजन बनाना होगा।

     2027 के बाद राष्ट्रीय राजनीति में संभावित भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका पूरा ध्यान फिलहाल उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की सेवा और प्रदेश को आर्थिक, सामाजिक तथा शासन के स्तर पर आगे ले जाने पर है।उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके लिए “राष्ट्र प्रथम” मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा की जिम्मेदारी दी है और फिलहाल उनका ध्यान इसी जिम्मेदारी को पूरा करने पर केंद्रित है।