रायपुर, 3 नवंबर। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि देश की ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों को युवा अवसर के रूप में लें और आधुनिक तकनीक, अनुसंधान तथा नवाचार के माध्यम से उनके समाधान विकसित करें। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उन्नत विनिर्माण तकनीक भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के प्रमुख आधार होंगे।
श्री रेड्डी मंगलवार को एनआईटी रायपुर के 17वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में 1,364 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 51 पदकों से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने संस्थान में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सात अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी उद्घाटन किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय कौशल आधारित, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराना है। भारत के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है कि वे आधुनिक तकनीक और अनुसंधान का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज की बेहतरी के लिए करें। उन्होंने सिलिकॉन वैली में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की उल्लेखनीय भागीदारी का उल्लेख करते हुए इसे देश की प्रतिभा और शिक्षा व्यवस्था की क्षमता का प्रमाण बताया।
समारोह में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल तथा सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अध्यक्षता एनआईटी रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने की। संस्थान के निदेशक प्रो. एन. वी. रमण राव सहित प्राध्यापक, अधिकारी, विद्यार्थी और अभिभावक भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर शुरू किए गए सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन कम्प्यूटेशनल मैकेनिक्स, सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन (COSINE), मैराल सेंटर फॉर इनोवेशन इन रूरल एंड ट्राइबल हेल्थ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज तथा सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज शामिल हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष अनुसंधान, एयरोस्पेस, नैनोसाइंस, सतत ऊर्जा और ग्रामीण एवं जनजातीय स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय एवं अंतर्विषयक अनुसंधान को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।
दीक्षांत समारोह में स्नातक के 976, स्नातकोत्तर के 283 और पीएचडी के 105 विद्यार्थियों सहित कुल 1,364 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।




