रायपुर, 06 नवंबर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की नई व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर किसानों को परेशान करने और उन्हें धान बेचने से रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता, रकबे के आधार पर टोकन की संख्या सीमित करने, टोकन निरस्त होने की आशंका और धान खरीदी की अवधि घटाने जैसे फैसलों ने प्रदेश के अन्नदाताओं के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
श्री बैज ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि सरकार धान खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने का दावा कर रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। ओटीपी के स्थान पर बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या, सर्वर डाउन रहने और बायोमेट्रिक मशीनों में तकनीकी खराबी के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ सकता है। फिंगरप्रिंट का मिलान नहीं होने पर किसानों को बिना धान बेचे ही खरीदी केंद्रों से लौटना पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टोकन व्यवस्था को सरल, सुगम और विकेंद्रीकृत बनाया था, जबकि वर्तमान सरकार ने रकबे के आधार पर टोकन की संख्या सीमित कर किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को केवल एक टोकन देने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक ही बार में पूरी फसल की कटाई, परिवहन और बिक्री करना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने धान खरीदी की निर्धारित अवधि में कटौती को भी किसान विरोधी फैसला बताया। उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितता और खेतों में नमी जैसी परिस्थितियों के बीच खरीदी 15 दिन पहले बंद करने का निर्णय किसानों को जल्दबाजी में धान बेचने के लिए मजबूर कर सकता है। इससे किसानों को अपनी उपज बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर बेचने की नौबत आ सकती है।




