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छत्तीसगढ़ के उत्पादों को दुनिया में पहचान दिलाने की पहल – भूपेश

रायपुर 20सितम्बर।छत्तीसगढ़ के कृषि,उद्यानिकी एवं वनोपज, सहित हैण्डलूम-कोसा आदि विविध उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन एवं विक्रय को बढ़ावा देने के लिए आज से राजधानी में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेताओं का सम्मेलन प्रारंभ हुआ।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में 16 देशों के 57 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि एवं क्रेतागण तथा देश के विभिन्न राज्यों से 60 प्रतिनिधि एवं क्रेतागण पहुंचे हैं।

श्री बघेल ने छत्तीसगढ़ में पहली बार हो रहे इस सम्मेलन में पहुंचे विदेशी मेहमानों का अपनी तथा मेहतनकश किसानों की ओर से तहेदिल से स्वागत किया।उन्होंने कहा कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार की पहली और सबसे सर्वोच्च प्राथमिकता है।इस सम्मेलन का आयोजन कृषि, हैण्डलूम और हस्तशिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराना और किसानों और कृषि उत्पाद से जुड़े विभिन्न संगठनों को आपस में जोड़ना है।राज्य सरकार की इस पहल का क्रेता और विक्रेता दोनों तरफ से सराहना मिल रही है।

उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान मेहनतकश, कर्मठ और ईमानदार है।रायपुर केवल छत्तीसगढ़ की ही राजधानी नहीं बल्कि विविध कृषि उत्पाद और वनौषधि की भी राजधानी है। छत्तीसगढ़ में प्राचीनकाल से परम्परागत एवं नैसर्गिक रूप से औषधियुक्त कोदो, कुदकी, रागी, सांवा को उगाया जाता है। कुछ समय से इस रूझान में कमी आ रही थी।ऐसे आयोजनों के माध्यम से उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संबंध बढ़ेगा और इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार मिलने से जहां किसानों को फायदा होगा वहीं उपभोक्ताओं को सही दाम पर सामग्री मिलेगी। छत्तीसगढ़ के कोसा वस्त्रों, फल और सब्जियों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया राजधानी रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट एवं कार्गो हब बनाने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह किया गया है।

सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री बघेल ने विदेश-स्वदेश से आए क्रेताओं और प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने ’छत्तीसगढ़ उत्पाद’ के प्रतीक चिन्ह को जारी किया। यह चिन्ह राज्य के कृषि उत्पादों हैण्डलूम और हैण्डीक्राफ्ट में उपयोग किया जाएगा।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने इस मौके पर आशा व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के चावल की खुशबू अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में महकेगी और यहां की वनौषधियों जंगलों से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगी।उन्होंने छत्तीसगढ़ के परम्परागत उत्पादों की नैर्सिगिता, गुणवत्ता और उत्कृष्टता की तारीफ करते हुए इसके माध्यम से पूरी दुनिया को लाभान्वित करने पर बल दिया।