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ऋषि परंपरा के व्यक्ति थे चंदूलाल चंद्राकर – भूपेश

दुर्ग 02 फऱवरी।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ पत्रकार रहे स्वर्गीय चंदूलाल चंद्राकर ऋषि परंपरा के व्यक्ति थे। वे 96 देशों में घूमे लेकिन अपना ठेठ छत्तीसगढ़ीपन नहीं छोड़ा।

श्री बघेल ने स्वर्गीय चंद्राकर की 25 वीं पुण्यतिथि तथा 100 वीं जयंती के अवसर पर जिले के कोलिहापुरी में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि उनकी उपलब्धियां विस्तृत थीं लेकिन उनकी शालीनता ऐसी थी कि कभी इनकी चर्चा नहीं करते थे। बीएसपी की रेल मिल, गंगरेल बांध जैसी कई उपलब्धियों में उनका योगदान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सार्वजनिक उपलब्धियों से हम सब परिचित ही हैं उनसे जुड़ी हुई कई स्मृतियां हैं। वे आधुनिक कृषि की बात उस समय करते थे जब लोग इसके बारे में सुनने से भी चकित हो जाते थे। इस क्षेत्र में फल और सब्जी के उत्पादन में जो वृद्धि हुई है उसमें उनकी सोच का बड़ा योगदान है। अपने लोगों से वे हमेशा जुड़े रहे और छोटे बड़े सभी से पत्र व्यवहार करते रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नया रायपुर में सभी चैक चैराहों में छत्तीसगढ़ के विभूतियों की प्रतिमा लगाई जाएगी। साथ ही पाठ्यक्रम में भी इनकी जीवनी सम्मिलित की जाएगी। इस मौके पर गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने भी अपनी स्मृतियां साझा की। उन्होंने कहा कि अंजोरा में आयोजित कृषि मेला अंचल में कृषि के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।

दिल्ली के दिनों की याद साझा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने बताया किदिल्ली में बहादुरशाह मार्ग में रोज मुलाकात होती थी और इन मुलाकातों में मैने जाना कि कितने सहज शालीन और सबको साथ में रखकर चलने का व्यक्तित्व श्री चंद्राकर का था। वे भारतीय लोकतंत्र की शान थे। उनका चरित्र उज्ज्वल था। वे साधुओं की तरह थे। मास्को जैसे शहरों में भी उन्होंने शराब नहीं पी, मांसाहार नहीं किया, ऐसे व्यक्ति दुर्लभ होते हैं।

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