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मध्य प्रदेश: कमलनाथ के करीबी और छिंदवाड़ा महापौर विक्रम अहाके भाजपा में हुए शामिल

अमरवाड़ा से पूर्व विधायक कमलेश शाह को लेकर नकुलनाथ के बयान से आहत होकर छिंदवाड़ा नगर निगम महापौर विक्रम अहाके भाजपा में शामिल हो गए। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की उपस्थिति में अहाके ने भाजपा की सदस्यता ली। अहको कमलनाथ के करीबी माने जाते है।

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे है। सोमवार को छिंदवाड़ा नगर निगम महापौर विक्रम अहाके ने भाजपा की सदस्यता ले ली। उनको मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सदस्यता दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छिंदवाड़ा में नकुलनाथ के अमरवाड़ा से पूर्व विधायक कमलेश शाह को लेकर दिए बयान से आहत होकर विक्रम अहाके ने भाजपा की सदस्यता ली। दरअसल नकुलनाथ ने कमलेश शाह के भाजपा में शामिल होने पर उनको गद्दार कहा था। शाह आदिवासी वर्ग के बड़े नेता है। विक्रम अहाके भी आदिवासी वर्ग से आते है। विक्रम अहाके के साथ छिंदवाड़ा नगर निगम जल विभाग सभापति प्रमोद शर्मा, अनुसूचित जाति विभाग जिला अध्यक्ष सिद्धांत थनेसर, पूर्व एनएसयूआई जिला अध्यक्ष आशीष साहू, पूर्व एनएसयूआई जिला उपाध्यक्ष धीरज राऊत, पूर्व एनएसयूआई जिला कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य उपाध्याय, पूर्व एनएसयूआई विधानसभा अध्यक्ष सुमित दुबे भी भाजपा में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा में कमलनाथ जी ने बहुत गड़बड़ की है। नकुलनाथ जी ने आदिवासी अंचल का अपमान किया था। उन्होंने विधायक कमलेश शाह को बेईमान और गद्दार कहकर आदिवासी वर्ग का अपमान किया। इसी बात से आहत होकर विक्रम अहाके ने कहा कि मुझे उस पार्टी में नहीं रहना, जहां आदिवासी वर्ग का अपमान होता है। उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। सीएम ने कहा कि छिंदवाड़ा के विकास में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी जाएगी। विक्रम अहाके ने कहा कि देश और प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। छिंदवाड़ा में खिलेगा कमल का फूल खिलेगा।

यह नेता भी भी हो चुके छिंदवाड़ा से भाजपा में शामिल
छिंदवाड़ा जिले में भाजपा लगातार पूर्व सीएम कमलनाथ को झटके पर झटका दे रही है। कुछ दिन पहले छिंदवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस के 7 पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता ली। इसके पहले पाढुर्ना नगर पालिका अध्यक्ष संदीप घोटोड़े, 16 सरपंच समेत कई नेताओं भगवा पार्टी में शामिल हुए। वहीं, कमलनाथ के करीबी सैयद जाफर और पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना के पुत्र अजय सक्सेना एवं पूर्व मंत्री तेजीलाल सरयाम की बहु सुहागवती सरयाम भी भाजपा छोड़ चुके हैं। अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह। हालांकि उन्होंने भाजपा की सदस्यता से पहले विधायक पद से इस्तीफा दे दिया।

कमलनाथ जी आज भी सम्मानीय ओर कल भी रहेंगे
कमलेश शाह ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से प्रभावित होकर भाजपा में आए है। जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ जनता को मिल रहा है। उन्होंने पूर्व सीएम कमलनाथ से नाराजगी के सवाल पर कहा कि उनकी कमलनाथ जी से कोई नाराजगी नहीं है। शाह ने कहा उनके लिए कमलनाथ जी कल भी सम्मानीय थे, आज भी हैं और कल भी सम्मानीय रहेंगे।

मोदी लहर में भी भाजपा को नहीं मिली जीत
छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर भाजपा को 2014 में मोदी लहर के बावजूद जीत नहीं मिली थी। यहां से कमलनाथ ने 9 बार लोकसभा का चुनाव जीता और वह दो बार यहां से विधायक भी बनें। पिछली बार 2019 में छिंदवाड़ा ही एक मात्र सीट थी, जिसे भाजपा जीतने में असफल रही थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा की सातों विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीती थी।

इस बार कमलनाथ का गढ़ बचाना आसान नहीं
भाजपा ने कमलनाथ के गढ़ में सेंध लगाने के लिए बड़ी रणनीति तैयार की है। पहले पूर्व सीएम कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को भाजपा में शामिल होने को लेकर अटकलें लगी, लेकिन जब यह विफल हो गई तो भाजपा ने उनके करीबियों को तोड़ने की चाल चली। छिंदवाड़ा में भाजपा के पदाधिकारी हजारों कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल करने का दावा कर रहे है। वहीं, पिछली बार नकुलनाथ को लोकसभा चुनाव में करीब 37 हजार वोटों से जीत मिली थी। वहीं, कमलनाथ भी विधानसभा का चुनाव 25 हजार वोटों से जीते। ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि इस बार पूर्व सीएम को अपना गढ़ बचाना बड़ी चुनौती होगा।