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डॉ. परदेशी राम वर्मा की कहानियों का हो रहा हैं विदेशी भाषाओं में अनुवाद

भिलाई नगर, 18 मार्च। छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा की कहानियाँ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं। उनकी रचनाओं का रूसी, अंग्रेजी और उर्दू भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। यह महत्वपूर्ण कार्य नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में जारी है।

   इसी क्रम में डॉ. वर्मा को 15 और 16 मार्च को जेएनयू के हिन्दी विभाग द्वारा ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। इस दौरान उन्होंने हिन्दी के विद्यार्थियों और फ्रेंच, अंग्रेजी, रूसी व उर्दू के शोधार्थियों के साथ अपनी कहानियों पर विस्तृत चर्चा की। विद्यार्थियों को उनसे संवाद करने और साहित्यिक अनुभव साझा करने का अवसर मिला।

    अपने व्याख्यान में डॉ. वर्मा ने बताया कि उनकी अधिकांश कहानियाँ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश से प्रेरित हैं। विद्यार्थियों ने उनके विचारों को गंभीरता से सुना और कई शोधार्थियों ने उनकी कहानियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

   कार्यक्रम के दौरान हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मलखान सिंह ने डॉ. वर्मा द्वारा संपादित पत्रिका ‘नव आगमन’ के संत कवि पवन दीवान पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन किया। इसके बाद पत्रिका की प्रतियाँ छात्रों को वितरित की गईं।

   डॉ. वर्मा ने विश्वविद्यालय के लोहित छात्रावास में भी छात्रों से मुलाकात की। इस अवसर पर उनकी पुत्री स्मिता वर्मा और नीतीश भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कई छात्र-छात्राओं—तन्मय कश्यप (जांजगीर), श्रेया सिंह यादव (बिलासपुर), श्रावणी वर्मा (रायपुर) और मिलिंद साहू (बिलासपुर) ने भी भाग लिया।

  डॉ. परदेशी राम वर्मा ने कहा कि दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से मिलना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। कार्यक्रम का संचालन पीयूष प्रखर ने किया।

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