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मनरेगा की मूल आत्मा खत्म कर मजदूरों से छीना गया काम का अधिकार : डॉ.महंत

महासमुंद |10 जनवरी।छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा की मूल भावना को खत्म करने और मजदूरों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने का आरोप लगाया।

  कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत महासमुंद जिला कांग्रेस भवन में आयोजित पत्रकार-वार्ता में डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार बीते दो वर्षों में लगभग 90 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राज्य की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं और सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में भाजपा की डबल इंजन सरकार 125 दिनों की मजदूरी का भुगतान कैसे करेगी, यह बड़ा सवाल है।

  उन्होंने कहा कि मनरेगा कानून में किया गया परिवर्तन पूरी तरह श्रमिक विरोधी है और यह महात्मा गांधी के विचारों व आदर्शों पर सीधा हमला है। ‘सुधार’ के नाम पर लोकसभा में पारित नया बिल दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करने की कोशिश है, जिससे सबसे गरीब तबके से काम का अधिकार छीना जा रहा है।

   डॉ. महंत ने बताया कि पहले मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित योजना थी, लेकिन नए फ्रेमवर्क में इसे शर्तों वाली, केंद्र द्वारा नियंत्रित स्कीम में बदल दिया गया है। यह गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की अवधारणा के खिलाफ है।

  उन्होंने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए पिछले दो दशकों से जीवनरेखा रही है और कोविड-19 जैसी आपदा के दौरान इसने आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। लेकिन अब इसे कानून से योजना में बदल दिया गया है, जिससे मजदूरों का अधिकार सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गया है।

  डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि नए सिस्टम में तय समय पर जबरन रोजगार रोका जा सकता है। फंड खत्म होने या फसल के मौसम के नाम पर मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित रखा जा सकता है, जिससे सरकार यह तय करेगी कि गरीब कब कमाएंगे और कब भूखे रहेंगे।

उन्होंने बताया कि पहले मनरेगा में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती थी, लेकिन अब खर्च का अनुपात 60:40 कर दिया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार राज्य से पहले 50 प्रतिशत राशि जमा कराने के बाद ही फंड जारी करेगी। राज्यों की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह व्यवस्था मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है।

डॉ. महंत ने कहा कि मोदी सरकार ‘जी राम जी’ योजना के तहत राज्यों पर लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है। 100 से 125 दिन मजदूरी की बात केवल दिखावा है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से मनरेगा के काम बंद कर दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत रोजगार मात्र 38 दिन रहा है, यानी किसी भी साल 100 दिन का काम नहीं दिया गया। मनरेगा मजदूरों का अधिकार था, जिसे अब प्रशासनिक सहायता में बदल दिया गया है।