
रायपुर, 25 जनवरी।छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि इंटरनेट और न्यू जनरेशन के इस दौर में भी प्रिंट मीडिया और साहित्य का महत्व कभी कम नहीं होगा। साहित्य और कविता समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं और उनमें निहित संदेश मानव जीवन को दिशा देने का माध्यम बनते हैं।
राज्यपाल श्री डेका आज नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि’ के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैसे संगीत के सात स्वर हमें एक सूत्र में बाँधते हैं, उसी तरह साहित्य का आदान-प्रदान नए विचारों को समझने और सीखने का अवसर प्रदान करता है।
राज्यपाल ने कहा कि बीते तीन दिनों में इस मंच पर साहित्य, समाज और जीवन से जुड़े विषयों पर सार्थक और गहन चर्चाएं हुईं। विचारों का खुला आदान-प्रदान इस उत्सव की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए न केवल यादगार बल्कि सीखने वाला अनुभव भी रहा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ और देशभर से आए प्रतिष्ठित प्रकाशकों ने पुस्तकों का उत्कृष्ट संग्रह प्रस्तुत किया। पाठकों को नई पुस्तकों से जुड़ने और पढ़ने का समृद्ध अवसर मिला, जो आज भी समाज में पुस्तकों के प्रति गहरी रुचि को दर्शाता है।
श्री डेका ने कहा कि साहित्य और संगीत का सतत आदान-प्रदान आवश्यक है और ऐसे साहित्यिक उत्सव निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए। उन्होंने सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसे आयोजन राज्य के अन्य शहरों और गाँवों तक भी पहुँचने चाहिए तथा इनमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज की पीढ़ी छत्तीसगढ़ की रामायणकालीन संस्कृति और साहित्य से दूर होती जा रही है, जबकि राज्य की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है। इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए ताकि राज्य के बाहर के लोग भी छत्तीसगढ़ की पहचान से परिचित हो सकें।
राज्यपाल ने कहा कि शब्दों में अपार शक्ति होती है।उन्होंने बंकिमचंद्र चटर्जी के ‘वंदे मातरम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दो शब्दों ने पूरे देश को जागृत किया। साहित्य हमें जोड़ता है, सोचने की नई दिशा देता है और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक ऐसा कार्य अवश्य करें, जो निस्वार्थ भाव से समाज और देश के लिए हो।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वित्त मंत्री ओ. पी.चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साहित्य की अविरल धारा सदैव बहती रही है। कालिदास और रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महान साहित्यकारों का ऐतिहासिक जुड़ाव भी इस भूमि से रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजन निरंतर होते रहेंगे।
समापन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात रंगकर्मी और नाट्य लेखक डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। इस अवसर पर फिल्म अभिनेता-निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी, फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग बसु, मुख्यमंत्री के सलाहकार आर.कृष्णा दास, मीडिया सलाहकार पंकज झा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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