प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी को ब्रह्मपुत्र पर बने छह लेन वाले कुमार भास्कर वर्मा सेतु का उद्घाटन करेंगे। यह पुल केवल इंजीनियरिंग का कमाल ही नहीं है बल्कि एक टाइम कटर भी है। यह पुल गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी के बीच यात्रा का समय 45 से 60 मिनट से घटाकर सिर्फ 7 से 10 मिनट कर देगा।
1.24 किलोमीटर का यह एक्सट्राडोज्ड पुल 8.4 किलोमीटर बड़े कनेक्टिविटी कॉरिडोर का हिस्सा है। इसे बनाने में लगभग 3,300 करोड़ रुपए का खर्च आया है। लगभग 3,300 करोड़ रुपए की लागत से बना यह स्ट्रक्चर, मौजूदा नदी क्रॉसिंग पर दवाब कम करने और असम के सबसे बड़े शहर, गुवाहाटी में बढ़ते गाड़ियों के ट्रैफिक को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है।
अब,तक आने-जाने वालों को रोजाना मुश्किलों का समना करना पड़ता था, वे अक्सर भीड़भाड़ वाले सरायघाट ब्रिज या कभी न खत्म होने वाली फेरी सर्विस पर निर्भर रहते थे।
घंटों के जाम से निजात दिलाएगा पुल
पीक आवर्स में, सरायघाट से होकर जाने वाले सड़क रास्ते में जाम लगने की वजह से एक घंटे से ज्यादा का समय लग सकता है, जबकि भारी मानसूनी बाढ़ या सर्दियों के घने कोहरे की वजह से फेरी क्रॉसिंग अक्सर रुक जाती है। कुमार भास्कर वर्मा सेतु एक सीधा, हर मौसम में चलने वाला जमीनी संपर्क देता है, जो ब्रह्मपुत्र के पानी के लेवल के बावजूद चालू रहता है।
ट्रैफिक कम करने के अलावा, यह पुल शहर के दक्षिणी किनारे पर भीड़ कम करने के एक बड़े प्लान का हिस्सा है। गुवाहाटी हाई कोर्ट और कई जरूरी सरकारी ऑफिस नॉर्थ गुवाहाटी में शिफ्ट होने वाले हैं, इसलिए नया पुल यह पक्का करता है कि उत्तरी किनारा आसानी से पहुंचा जा सके।
7वीं सदी के राजा के नाम रखा पुल का नाम
पुल का नाम कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर रखा गया है, जो 7वीं सदी में कामरूप साम्राज्य के राजा थे। उनके राज को बहुत खुशहाली लाने और पुराने असम की राजनीतिक स्थिति को ऊंचा करने के लिए जाना जाता है।
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