मुख्यमंत्री पद छोड़ राज्यसभा जा रहे नीतीश,शाह की मौजूदगी में दाखिल किया नामांकन

पटना, 05 मार्च। बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके साथ नितिन नबीन ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन भरा।
पटना में बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के कक्ष में नामांकन प्रक्रिया पूरी की गई। इस अवसर पर बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और एनडीए के वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस फैसले को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। वर्ष 2005 से अब तक कई कार्यकालों में मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का यह कदम उनके लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के अंत का संकेत माना जा रहा है।
नामांकन से पहले सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक भावनात्मक संदेश जारी करते हुए उन्होंने बिहार की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में जनता के विश्वास और समर्थन के बल पर ही बिहार विकास और सम्मान की नई पहचान बना पाया है।
नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि उनका लंबे समय से यह सपना रहा है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें। इसी उद्देश्य से उन्होंने इस बार राज्यसभा का चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नई सरकार के गठन के बाद भी वे राज्य के विकास के लिए अपना मार्गदर्शन और सहयोग देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि “बिहार के लोगों से मेरा संबंध पहले की तरह बना रहेगा और विकसित बिहार का संकल्प आगे भी जारी रहेगा।”
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ एनजीए गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला था। ऐसे में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता बिहार का नया मुख्यमंत्री बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका की ओर संकेत करता है। आने वाले दिनों में बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।




