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छत्तीसगढ़ में ‘जनगणना 2027’ की डिजिटल शुरुआत 16 अप्रैल से

रायपुर, 15अप्रैल।छत्तीसगढ़ में ‘भारत की जनगणना 2027’ के पहले चरण की शुरुआत कल 16 अप्रैल से होने जा रही है।

     यह अभियान राज्य के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल और कागजरहित तरीके से संचालित किया जाएगा। इस व्यापक प्रक्रिया का उद्देश्य केवल जनसंख्या संबंधी आंकड़े जुटाना ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए सटीक सामाजिक-आर्थिक योजनाओं की ठोस नींव तैयार करना भी है।

     भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के मार्गदर्शन में संचालित इस चरण में ‘स्व-गणना’ को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत नागरिक स्वयं आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in/ पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। साथ ही, नागरिकों की सुविधा के लिए 16 अप्रैल से टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी राज्यभर में शुरू किया जा रहा है।

     स्व-गणना प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाया गया है। पंजीकरण के लिए परिवार के किसी वयस्क सदस्य को मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी सत्यापन करना होगा। इसके बाद परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी जैसे घर की स्थिति, पेयजल, शौचालय, ऊर्जा स्रोत आदि दर्ज करने होंगे। साथ ही प्रत्येक सदस्य के व्यक्तिगत विवरण—नाम, आयु, लिंग, वैवाहिक स्थिति, शिक्षा, व्यवसाय और मातृभाषा—भी भरना अनिवार्य रहेगा।

     डेटा भरने के बाद नागरिकों को अंतिम सबमिशन से पहले पूरी जानकारी की समीक्षा करने का अवसर मिलेगा। सफल सबमिशन के बाद एक डिजिटल सेंसस रेफरेंस नंबर जारी किया जाएगा, जिसे बाद में प्रगणक द्वारा सत्यापन के समय प्रस्तुत करना होगा। इससे डेटा सत्यापन की प्रक्रिया तेज और त्रुटिरहित बनेगी।

    इस पहले चरण में मुख्य रूप से ‘मकान सूचीकरण एवं आवास गणना’ (हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस) का कार्य किया जाएगा। इसके तहत परिसंपत्तियों, संचार साधनों और परिवहन सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्रित की जाएगी, जो राज्य के विकास और जीवन स्तर के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    राज्य के सभी 33 जिलों और लगभग 19,978 गांवों में इस अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इनमें 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं, जो घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।

     सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्रित सभी जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा, न कि किसी कानूनी या कर संबंधी प्रक्रिया में।

     दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। हेल्पलाइन 1855 के माध्यम से नागरिकों को तकनीकी सहायता और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

    राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में स्व-गणना पोर्टल का उपयोग करें और इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि सटीक आंकड़ों के आधार पर बेहतर भविष्य की योजनाएं तैयार की जा सकें।

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