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बूढ़ा महादेव से भोरमदेव तक 18 किमी की भव्य पदयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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कबीरधाम, 03 अगस्त। सावन माह के प्रथम सोमवार पर बूढ़ा महादेव मंदिर से ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर तक आयोजित 18 किलोमीटर लंबी पारंपरिक पदयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे मार्ग पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

      पदयात्रा की शुरुआत प्रातः बूढ़ा महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान शिव के पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद कांवड़ और भगवा ध्वज लेकर श्रद्धालु भोरमदेव धाम के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला।

      इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी श्रद्धालुओं के साथ पैदल यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

      करीब 18 किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यापक व्यवस्था की। जगह-जगह पेयजल, शरबत, फल, जलपान और चिकित्सा सहायता के शिविर लगाए गए। सेवा कार्यों में युवाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

      यात्रा के दौरान शिव भजनों, डमरू की गूंज और ‘हर-हर महादेव’ के नारों से पूरा वातावरण शिवमय बना रहा। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान भोलेनाथ का गुणगान करते हुए भोरमदेव धाम की ओर बढ़ते रहे।

      भोरमदेव मंदिर पहुंचने पर भगवान भोरमदेव के जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के साथ पदयात्रा का समापन होगा। इस दौरान श्रद्धालु प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति, अच्छी वर्षा तथा जनकल्याण की प्रार्थना करेंगे।

     सावन के प्रथम सोमवार पर आयोजित यह ऐतिहासिक पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और जनभागीदारी का भी सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई। हजारों शिवभक्तों की सहभागिता ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि कबीरधाम में सावन का पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनआस्था का एक विराट उत्सव है।