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एनसीएलटी के फैसले पर राहुल गांधी का तंज, बोले- ‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’

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नई दिल्ली, 28 अगस्त। मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा से जुड़े दिवाला मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एनसीएलटी के नाम को लेकर तंज कसते हुए इसे ‘‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’’ बताया और आरोप लगाया कि देश में आम लोगों और चुनिंदा बड़े कारोबारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गई हैं।

     राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि किसान 50 हजार रुपये का कर्ज नहीं चुका पाए तो उसकी जमीन नीलाम हो जाती है, जबकि वेतनभोगी वर्ग की एक किस्त छूटने पर बैंक दबाव बनाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों को शिक्षा के लिए कर्ज हासिल करना भी मुश्किल होता है, लेकिन चुनिंदा उद्योगपतियों के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं—एक कुछ अरबपतियों के लिए और दूसरी देश के बाकी लोगों के लिए।

22 हजार करोड़ के दावों पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी एनसीएलटी के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वित्तीय शब्दावली में जब किसी लेनदार को उसकी बकाया रकम का केवल एक हिस्सा मिलता है तो शेष राशि को ‘हेयरकट’ कहा जाता है।

    जयराम रमेश के मुताबिक, एनसीएलटी ने एक प्रमुख कारोबारी की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने इसे महज ‘हेयरकट’ नहीं बल्कि ‘‘मुंडन’’ करार देते हुए कहा कि इससे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

    एनसीएलटी के आदेश के अनुसार, इस व्यवस्था से कर्जदाताओं को उनके स्वीकृत दावों का करीब 99.97 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ेगा।

एचडीएफसी बैंक ने फैसले का किया विरोध

    मामले में एचडीएफसी बैंक ने भी एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) का रुख करने के संकेत दिए हैं। बैंक के अनुसार, सुभाष चंद्रा से जुड़े मामले में उसका कुल दावा करीब 680 करोड़ रुपये था, लेकिन एनसीएलटी के आदेश के तहत इसका केवल 3.2 प्रतिशत हिस्सा ही स्वीकार किया गया है।

      बैंक ने कहा कि उसने कर्ज समाधान योजना का विरोध किया था और इसके खिलाफ मतदान भी किया, लेकिन योजना को बहुमत से मंजूरी मिल गई। बैंक अब एनसीएलएटी में अपील दायर करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

      एचडीएफसी बैंक ने यह भी बताया कि बैंक के विलय से पहले संबंधित ऋण सुविधा उसकी मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड से हासिल की गई थी।

सुभाष चंद्रा ने दावों पर दी सफाई

     विवाद बढ़ने के बाद सुभाष चंद्रा की ओर से भी बयान जारी किया गया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ कुल दावा 3,992 करोड़ रुपये का है। उनका कहना है कि इस राशि के मामले में वह स्वयं उधारकर्ता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका में थे।चंद्रा ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी भी ऋणदाता से व्यक्तिगत रूप से कोई पैसा उधार नहीं लिया है।