
बेगूसराय, 2 नवंबर।बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आज राज्य में अपने दौरे के दौरान एक अलग अंदाज़ में जनसंपर्क किया।
श्री गांधी ने यहां आयोजित विशाल जनसभा में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर तीखे हमले किए, वहीं सभा के बाद वे स्थानीय मछुआरों के साथ तालाब में उतरकर मछली पकड़ते भी नजर आए। राहुल गांधी का यह दृश्य कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सभा में मोदी-नीतीश पर हमला
श्री गांधी ने कहा कि बिहार के युवाओं को “मजबूरी में मजदूर” बना दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि “बिहार का युवा मेहनती है, लेकिन उसे अवसर नहीं दिया गया। यहां शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य की हालत खराब है, और सरकार सिर्फ बड़े उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है।” उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे “वोट चोरी” से सावधान रहें और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर मतदान करें।
तालाब में उतरकर पकड़ी मछली
सभा के बाद राहुल गांधी बेगूसराय के नजदीकी गांव के एक तालाब पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय मछुआरों से बातचीत की। मछुआरों के आग्रह पर राहुल गांधी ने खुद जाल थामा और तालाब में उतरकर मछली पकड़ने की कोशिश की।
नाव पर बैठकर उन्होंने कहा, “मेरी राजनीति कागज पर नहीं, जमीन पर है। मैं उस भारत को समझना चाहता हूं जो मेहनत से चलता है — किसान, मजदूर और मछुआरे इस देश की रीढ़ हैं।”
राहुल गांधी ने इस मौके पर मछुआरा समुदाय के लिए कई वादे किए — जिनमें मछली बीमा योजना, प्रशिक्षण केंद्र और बाजार सुविधाओं की स्थापना शामिल है।
प्रतीकात्मक संदेश और राजनीतिक मायने
राहुल गांधी का तालाब में उतरना कांग्रेस की “जनजुड़ाव यात्रा” का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह कदम ग्रामीण मतदाताओं और पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े वर्गों को संदेश देने के लिए था कि कांग्रेस “ज़मीन से जुड़ी राजनीति” में विश्वास रखती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी का यह जमीनी अंदाज “राहुल गांधी बनाम सत्ता” की छवि को और मजबूती दे रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल
राहुल गांधी के मछली पकड़ने का वीडियो कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया गया, जो कुछ ही घंटों में लाखों बार देखा जा चुका है। समर्थकों ने इसे “जनता से जुड़ने का सच्चा उदाहरण” बताया, जबकि विरोधियों ने इसे “चुनावी नाटक” कहा।



