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राहुल गांधीः अदालत में कानूनी जंग, बाहर संवेदना का संदेश

(संतोष कुमार यादव)

सुल्तानपुर 20 फरवरी। सुलतानपुर जिला अदालत में हुई यह पेशी महज़ तारीख़ पर हाज़िरी नहीं थी, बल्कि समकालीन राजनीति के कई अर्थों को साथ लेकर आई एक घटना बन गई।

  राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए खारिज किया और न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा जताया। अदालत कक्ष में उनका संयमित और विनम्र व्यवहार चर्चा का विषय बना। न्यायाधीश को हाथ जोड़कर अभिवादन करना और सुनवाई के बाद धन्यवाद कहना, इस पूरे घटनाक्रम को एक शालीनता का स्पर्श दे गया। राजनीति में अदालतों तक पहुंचना अब असामान्य नहीं रहा, लेकिन हर पेशी केवल कानूनी बहस नहीं होती, वह एक सार्वजनिक संदेश भी होती है। सुल्तानपुर की यह यात्रा भी दो स्पष्ट आयामों में दिखी। पहला, कानूनी मोर्चे पर अपनी बेगुनाही का दावा और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास जताना। दूसरा, अदालत से निकलकर एक साधारण मोची के परिवार तक पहुंचना, संवेदना, स्मृति और सामाजिक सरोकार का संकेत देना।  सुनवाई के बाद उनका काफिला कूरेभार क्षेत्र में रुका, जहां उन्होंने स्वर्गीय रामचेत मोची के परिवार से मुलाकात की। यह वही मोची थे, जिनसे एक वर्ष पूर्व राहुल गांधी ने जूते सिलने के गुर सीखे थे। उस समय की तस्वीरें और वीडियो व्यापक चर्चा में रहे थे।

  परिवार से मुलाकात के दौरान उन्होंने छोटे बच्चे को गोद में लेकर उसकी चोट देखी और संवेदना व्यक्त की। यह दृश्य राजनीतिक बयान से कहीं अधिक प्रभावशाली प्रतीक बन गया।  राजनीति में अदालतों के चक्कर अब नई बात नहीं, लेकिन हर पेशी अपने साथ एक प्रतीकात्मक अर्थ लेकर आती है। सुल्तानपुर की यह घटना भी दो पहलुओं में बंटी नजर आई, एक ओर कानूनी लड़ाई, दूसरी ओर सामाजिक सरोकार का प्रदर्शन। अंतिम निर्णय न्यायालय के हाथ में है, किंतु फिलहाल यह प्रकरण राजनीतिक विमर्श और जनभावनाओं के बीच अपनी विशेष जगह बना चुका है।