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छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार 2026” की तैयारी तेज, 1 मई से लगेंगे समाधान शिविर

रायपुर, 15 अप्रैल।छत्तीसगढ़ सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से इस वर्ष भी “सुशासन तिहार 2026” को व्यापक स्तर पर आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

     मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले वर्ष इस अभियान से मिले सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस बार इसे और अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक जिले में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसमें भूमि संबंधी मामलों जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के साथ-साथ मनरेगा मजदूरी भुगतान, हितग्राही योजनाओं के लंबित भुगतान, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, बिजली एवं ट्रांसफार्मर से जुड़ी समस्याएं और हैंडपंप सुधार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर रहेगा।

    “सुशासन तिहार 2026” के तहत 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही पात्र लोगों को मौके पर लाभ भी प्रदान किया जाएगा। साथ ही शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण करने और प्रत्येक आवेदक को उसकी स्थिति की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

     अभियान के दौरान मंत्री, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों का निरीक्षण करेंगे और लोगों से सीधा संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री स्वयं भी विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति का औचक निरीक्षण करेंगे तथा हितग्राहियों से फीडबैक लेंगे। इसके साथ ही जिला मुख्यालयों में समीक्षा बैठक कर योजनाओं की प्रगति और आवेदन निपटान की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

   जनसम्पर्क विभाग और जिला प्रशासन को इस अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें और अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करें, जिससे प्रदेश के नागरिकों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

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