(दर्शन कुमार साहू)
सुलतानपुर, 19 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने शनिवार को सुल्तानपुर के प्रमुख आस्था केंद्र धोपाप दियरा घाट से विपक्ष के खिलाफ एक व्यापक राजनीतिक अभियान का शुभारंभ किया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जारी सियासी बहस के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही पहलुओं का स्पष्ट समावेश देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने भगवान श्रीराम और उनके परम सखा निषाद राज की भव्य प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। यह आयोजन केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रतिमा अनावरण के पश्चात आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की उपस्थिति रही, जहां डॉ. निषाद ने विपक्षी दलों पर तीखे प्रहार किए।
जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल को पारित होने से रोकने के प्रयासों ने विपक्ष के “महिला विरोधी चरित्र” को उजागर कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं के अधिकारों और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका सवालों के घेरे में है।
डॉ. निषाद ने यह भी जोर देकर कहा कि इस विधेयक में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए पृथक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि ऐसा नहीं किया गया तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व केवल प्रभावशाली और संपन्न वर्ग की महिलाओं तक सीमित रह जाएगा, जिससे सामाजिक न्याय की भावना प्रभावित होगी।
मंत्री ने अपने संबोधन में सुप्रीम कोर्ट के संदर्भ का उल्लेख करते हुए “आरक्षण में आरक्षण” की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अत्यंत जरूरी है, अन्यथा वंचित वर्ग की महिलाओं को उचित अवसर नहीं मिल पाएगा।
इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार पर भी निशाना साधा। डॉ. निषाद ने आरोप लगाया कि उस समय प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर थी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कानून का राज स्थापित हुआ है और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने यह भी कहा कि आगामी चुनावों में प्रदेश की महिलाएं विपक्ष के इस रवैये का करारा जवाब देंगी। इस अभियान की शुरुआत के साथ ही सुल्तानपुर की राजनीतिक गतिविधियों में एक बार फिर तेजी आ गई है और आने वाले दिनों में इसके व्यापक असर की संभावना जताई जा रही है।




