लखनऊ, 20 अप्रैल। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। इसी रणनीति के तहत राज्य सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव को रविवार रात कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से मंजूरी दे दी है।
संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष इस विधेयक में खामियां बताते हुए इसका विरोध कर रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे महिला सशक्तीकरण से जोड़कर विपक्ष को घेरने में जुटी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस मुद्दे पर विपक्ष पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने विपक्ष के रुख की तुलना ‘द्रौपदी चीरहरण’ जैसे प्रसंग से करते हुए इसे महिला सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया था।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित विशेष सत्र में सरकार महिला आरक्षण पर अपना स्पष्ट पक्ष रखेगी और विपक्ष के विरोध को मुद्दा बनाकर उसे घेरने की कोशिश करेगी। सत्र के दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की संभावना भी जताई जा रही है।
विधानमंडल सत्र बुलाने के लिए नियमानुसार सदस्यों को कम से कम सात दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होता है, इसलिए इस प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए पारित किया गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
सरकार का आरोप है कि विपक्ष महिला सशक्तीकरण जैसे अहम मुद्दे को भी राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि विपक्ष इस विधेयक को अधूरा बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में 30 अप्रैल का विशेष सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक भिड़ंत का मंच भी बन सकता है, जहां दोनों पक्ष जनता के सामने अपनी-अपनी रणनीति और संदेश रखने की कोशिश करेंगे।




