(सन्तोष यादव)
सुलतानपुर 30 अप्रैल।बुधवार को आई तेज आंधी, तूफान और बारिश ने जिले में तबाही का ऐसा मंजर छोड़ा, जिसने सात परिवारों की खुशियां छीन लीं। महज कुछ मिनटों के इस मौसमीय प्रकोप में दो मासूम बच्चों समेत सात लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए।
अचानक आए तूफान से लोग संभल भी नहीं पाए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत एवं बचाव कार्य जारी है, वहीं प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। कूरेभार, धनपतगंज, बल्दीराय, हलियापुर, अखंडनगर, बंधुआकला और कुड़वार आदि क्षेत्रों में पेड़, कच्ची दीवार, छप्पर और बिजली के खंभे गिरने से हादसे हुए और हर तरफ चीख-पुकार मच गई। सबसे मार्मिक घटना कुड़वार थाना क्षेत्र के पूरे शिववंश दुबे गांव की रही, जहां 20 वर्षीय महेंद्र तिवारी की बिजली का खंभा गिरने से मौत हो गई। महेंद्र अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए दस दिन पहले ही घर लौटे थे और बुधवार को तिलक कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन अचानक आए तूफान ने सब कुछ उजाड़ दिया। खंभा गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई और शादी का घर मातम में बदल गया।

बल्दीराय थाना क्षेत्र में कस्बा माफियात निवासी सुरेश कुमार सोनकर की आठ वर्षीय पुत्री महिमा छप्पर ढहने से दब गई। कक्षा तीन की छात्रा महिमा को परिजन बचा नहीं सके। वहीं सिंघनी गांव में 58 वर्षीय रामबरन पर पेड़ गिरने से उनकी मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
हलियापुर क्षेत्र के डोभियारा गांव में 35 वर्षीय रीता कच्ची दीवार गिरने से मलबे में दब गईं और मौके पर ही दम तोड़ दिया। वह अपने पीछे तीन छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। अखंडनगर के बरामदपुर गांव में 18 वर्षीय सुरेमन की भी आंधी के दौरान मौत हो गई, जबकि दो किशोर गंभीर रूप से घायल हैं।

बंधुआकला थाना क्षेत्र के अलीगंज दाऊदपुर में जामुन का पेड़ गिरने से 40 वर्षीय सुषमा गुप्ता की जान चली गई, जबकि कुड़वार के पटना गांव में केवला देवी की दीवार गिरने से मौत हो गई। आंधी का असर जनहानि तक सीमित नहीं रहा। जिले के कई गांवों में पेड़ उखड़ गए, बिजली व्यवस्था ठप हो गई और कच्चे मकान धराशायी हो गए। बल्दीराय के हलियापुर में एक समारोह के दौरान विशाल पेड़ गिरने से अफरातफरी मच गई और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
कुछ ही पलों के इस तूफान ने जिले को ऐसा घाव दिया है, जिसे लोग लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे। कहीं बहन की शादी से पहले भाई की अर्थी उठी, तो कहीं मासूमों की हंसी हमेशा के लिए खामोश हो गई।




