रायपुर, 16 मई।सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को जांजगीर-चांपा, कोरबा और रायगढ़ जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की जमीनी समीक्षा की।
इस दौरान मुख्यमंत्री का ग्रामीणों से आत्मीय संवाद, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन, योजनाओं के क्रियान्वयन की पड़ताल और प्रशासनिक सुधारों को लेकर स्पष्ट संदेश देखने को मिला।
पीपल पेड़ की छांव तले खाट पर बैठे मुख्यमंत्री, ग्रामीणों से किया सीधा संवाद
जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोसला पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने औचक निरीक्षण के दौरान गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। मुख्यमंत्री बिना किसी औपचारिकता के पीपल पेड़ की छांव तले ग्रामीणों के बीच खाट पर बैठ गए। मुख्यमंत्री का यह सहज और आत्मीय व्यवहार ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों, महिलाओं और किसानों से शासन की योजनाओं के लाभ, राजस्व संबंधी समस्याओं और गांव की आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
“पटवारी गांव आते हैं या नहीं?” — मुख्यमंत्री ने ली जमीनी व्यवस्था की जानकारी
ग्रामीणों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पूछा कि पटवारी नियमित रूप से गांव आते हैं या नहीं। ग्रामीणों से सकारात्मक जवाब मिलने पर मुख्यमंत्री ने पटवारी शत्रुघन कुर्रे को निर्देश दिए कि किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े।
महतारी वंदन योजना से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल
ग्राम कोसला की सावित्री कश्यप ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने नियमित सहायता राशि मिल रही है, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना प्रदेश की लाखों महिलाओं को आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही है।
“लखपति दीदी” बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
चौपाल के दौरान गांव की लखपति दीदी नीमा तिवारी ने बताया कि बिहान योजना से मिली प्रारंभिक आर्थिक सहायता से उन्होंने आटा चक्की व्यवसाय शुरू किया था। आज उनके पास पांच आटा चक्कियां संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने को कहा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 474 परिवारों को मिली स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थिति की भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में ग्राम कोसला के 474 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास प्लस सर्वे के माध्यम से छूटे हुए पात्र हितग्राहियों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद सबसे पहले 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी दी गई थी।
महतारी सदन और हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की घोषणा
ग्रामीणों की मांगों पर मुख्यमंत्री ने ग्राम कोसला में महिलाओं की सुविधा के लिए “महतारी सदन” निर्माण तथा क्षेत्र में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की घोषणा की। इन घोषणाओं से ग्रामीणों, महिलाओं और विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
किसानों के हित में सरकार प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से जनप्रतिनिधि और अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
कोरबा में “लखपति दीदी” के गुपचुप स्टॉल पहुंचे मुख्यमंत्री
सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री का कोरबा जिले के लेमरू दौरा भी चर्चा में रहा। यहां उन्होंने ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लखपति दीदी मंजू के छोटे से स्टॉल पर पहुंचकर उनके हाथों से बने गुपचुप का स्वाद लिया और उनसे आत्मीय बातचीत की।
मंजू ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने छोटे स्तर से व्यवसाय शुरू किया था और आज मेहनत तथा बचत के बल पर भवन निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सेंटरिंग प्लेट के व्यवसाय से भी जुड़ गई हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और लखपति दीदी योजना महिलाओं के आत्मविश्वास और सम्मान का मजबूत आधार बन रही है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंजू को योजना के तहत 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक भी प्रदान किया।
रायगढ़ समीक्षा बैठक में तकनीक आधारित प्रशासन और ईंधन बचत पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने रायगढ़ स्थित सृजन सभाकक्ष में रायगढ़, जांजगीर-चांपा और कोरबा जिले के विकास कार्यों तथा प्रशासनिक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में तकनीक आधारित प्रशासन, ईंधन संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष फोकस रहा।
मुख्यमंत्री के पूर्व निर्देशों के अनुरूप जांजगीर-चांपा और कोरबा जिले के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जोड़ा गया। केवल संबंधित जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ही भौतिक रूप से उपस्थित रहे, जबकि अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इससे अधिकारियों के आवागमन में होने वाली पेट्रोल-डीजल की खपत कम हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशासनिक कार्यों में तकनीक का अधिकतम उपयोग कर पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए।
विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान की समीक्षा
बैठक में मुख्यमंत्री ने तीनों जिलों में संचालित विकास कार्यों, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, राजस्व मामलों के निराकरण तथा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त आवेदनों के समाधान की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
डीएमएफ राशि के प्रभावी उपयोग और मॉडल विलेज विकसित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा, रायगढ़ और कोरबा जैसे खनन प्रभावित जिलों में जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि के प्रभावी उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित गांवों में विकास कार्यों का प्रत्यक्ष लाभ लोगों को दिखाई देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को अतिरिक्त डिवीजन गठित करने और आवश्यक तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने खनन प्रभावित गांवों को प्राथमिकता के आधार पर “मॉडल विलेज” के रूप में विकसित करने की बात कही, जहां सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और सामुदायिक सुविधाओं का समुचित विकास किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि संवेदनशील, जवाबदेह और परिणाम आधारित प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना है।




