रायपुर, 12 जून। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा है कि फिल्में और डॉक्यूमेंट्री केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का प्रभावी माध्यम भी हैं।
श्री डेका ने यह बात रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में कही। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि आदिम काल से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों के जरिए अपने विचारों और संदेशों को अभिव्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मंचों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना और जागरूक बनाना भी रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय सिनेमा ने जनजागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता मिली है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और सकारात्मक पहलुओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए आगे आना चाहिए, जिससे क्षेत्र की सकारात्मक पहचान और मजबूत होगी।
श्री डेका ने ‘सद्गति’, ‘चरणदास चोर’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कलाकारों से उन्होंने इस दिशा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने मोबाइल की बढ़ती लत को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए कहा कि इसके कारण बच्चे खेल के मैदानों और रचनात्मक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कलाकारों से नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी सृजनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आने का आग्रह किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित डॉक्यूमेंट्री फिल्मों ‘छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम’, ‘हैप्पी बर्थडे’ और ‘स्क्रीन’ के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।




