होम छत्तीसगढ़ ‘चिंतन शिविर 3.0’ का समापन: विकसित छत्तीसगढ़ के रोडमैप पर मंथन

‘चिंतन शिविर 3.0’ का समापन: विकसित छत्तीसगढ़ के रोडमैप पर मंथन

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रायपुर, 5 जुलाई। विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को ठोस नीति और प्रशासनिक सुधारों में बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0′ के समापन पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि यह शिविर अब केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के लिए नीतिगत फैसलों और सुशासन के नए मॉडल का प्रभावी मंच बन चुका है।

      मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविर से मिले सुझावों को जल्द ही प्रशासनिक सुधारों और विकास योजनाओं में शामिल किया जाएगा। पर्यटन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), कृषि, नेतृत्व विकास और तकनीक आधारित सुशासन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के सुझावों को राज्य के दीर्घकालिक विकास रोडमैप का हिस्सा बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित शासन का मॉडल राज्य बनाना है।

     समापन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासन विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिविर में प्राप्त सुझावों को शीघ्र ही नीतिगत निर्णयों और प्रशासनिक सुधारों के रूप में लागू किया जाएगा।

      मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों से मिले सुझावों को सरकार ने सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे में तेजी और पारदर्शिता आई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के जरिए आम नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया गया है, जबकि ‘सेवा सेतु’ के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर शासन को अधिक सरल और जनसुलभ बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यही इस चिंतन प्रक्रिया की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि विचार अब परिणामों के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

      शिविर के दूसरे दिन सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषय पर आयोजित सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ श्री सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का प्रमुख हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना के विकास, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से विशेषकर बस्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।

      ‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिले को विकास का वास्तविक केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जिला आधारित विकास रणनीति, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप योजनाओं तथा डिस्ट्रिक्ट जीडीपी आधारित नियोजन पर बल दिया। उन्होंने ‘अमृत प्रयास’, ‘बनयान रिवोल्यूशन’ और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल रोजगार, उद्यमिता, कृषि परिवर्तन और स्थानीय नवाचार को नई गति देगा।

      समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, नीति क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास और लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए।

       दो दिवसीय शिविर में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियां, पर्यटन, कृषि और विकासपरक राजनीति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उद्घाटन सत्र में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, जनसेवा और नैतिक उत्तरदायित्व पर विचार रखते हुए कहा कि संवेदनशील और मूल्य आधारित नेतृत्व ही प्रभावी सुशासन की मजबूत नींव है।

      ‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज’ विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है, वहीं डिजिटल समावेशन और नवाचार के जरिए रोजगार सृजन के नए अवसर भी पैदा होंगे।

      ‘कृषि से समृद्धि’ विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक तथा बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए।

शिविर के दौरान मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने समूह आधारित विचार-विमर्श के माध्यम से विभिन्न विषयों पर सुझावों का आदान-प्रदान किया और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को मूर्त रूप देने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की।

        दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0′ ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती तकनीकों, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति जैसे क्षेत्रों में राज्य सरकार की दीर्घकालिक विकास दृष्टि को नई दिशा दी। विशेषज्ञों, मंत्रिपरिषद और प्रशासनिक नेतृत्व से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में इस चिंतन शिविर को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।